एनटीपीसी के खिलाफ आपदा प्रभावितों ने किया प्रदर्शन, जीएम का घेराव c

एनटीपीसी के खिलाफ आपदा प्रभावितों ने किया प्रदर्शन, जीएम का घेराव c
यंगवार्ता न्यूज़ - देहरादून 12-02-2021
 
ऋषिगंगा आपदा में अभी तक 37 शव बरामद हो चुके हैं। 167 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं ऋषिगंगा के मुहाने पर झील बनने से एक बार फिर क्षेत्र में बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। शासन ने वाडिया, टीएचडीसी, एनटीपीसी और आईआईआरएस को जांच करने का आदेश दिया है।
 
जिला प्रशासन ने अधिशासी अभियंता आरडब्ल्यूडी और तहसीलदार के नेतृत्व मे टीम बनाई है, जो फोटो के आधार पर और स्थानीय लोगों की मदद से लापता लोगों की तलाश में जुटी है। जहां भी लोगों के दबे होने की संभावना है। वहां एनडीआरएफ और कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
 
ऋषिगंगा में आई आपदा ने इंसानों के साथ ही जानवर भी इससे अछूते नहीं रहे। यहां एक फीमेल डॉग सात फरवरी से लगातार ऋषिगंगा को निहार रही है। उसे बिस्किट या कुछ और खाने को दो तो वह नहीं खा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सात फरवरी को आई बाढ़ में इस फीमेल डॉग के बच्चे भी बह गए।
 
साथ ही ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी इसे खाना देते थे, वह भी इसमें बह गए। उस दिन से यह फीमेल डॉग उदास है। वह रोज सुबह आकर एक जगह पर बैठकर नदी को निहारती है। कई लोगों ने उसे खाना देने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खाती है।
 
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि राज्य सरकार को झील की जानकारी है। प्राथमिक रूप से जानकारी मिली है कि 400 मीटर एरिया में झील बनी है व टीम मौके पर गई है। बैराज साइड में दबे हुए शवों को निकालने का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसे लेकर भी परिजनों में भारी आक्रोश बना हुआ है। तपोवन निवासी बसंती देवी डोभाल और शकुंतला देवी का कहना है कि आपदा के पांच दिन बाद भी उनके परिजनों का कोई सुराग नहीं लगा है।
 
परिजनों की आंखों मे आंसू और गुस्सा हैं। वहीं इस आपदा में दो भाईयों को खो चुके रविन्द्र थपलियाल का कहना है कि बैराज साइड में अभी तक शवों को निकालने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि बैराज साइड में कई स्थानों पर खून के निशान भी नजर आ रहे हैं, लेकिन अभी तक इस स्थान पर शवों को निकालने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।