35 वर्षों में से दर दर की ठोकरें खा रही बालसेविकाएं , आज तक पॉलिसी नहीं बना पाई सरकार

35 वर्षों में से दर दर की ठोकरें खा रही बालसेविकाएं , आज तक पॉलिसी नहीं बना पाई सरकार

यंगवार्ता न्यूज़ - बिलासपुर   13-10-2020

हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद के तहत विभिन्न जिलों में कार्यरत बाल सेविका और सहायिकाओं के लिए आज तक राज्य सरकार कोई पॉलिसी नहीं बना पाई। यही वजह रही कि अधिकतर महिला कर्मचारी इसी पद से सेवानिवृत्त भी हो चुकी हैं। विडंबना यह है कि नब्बे के दशक में प्रदेश भर में 369 सेंटर थे जो कि अब घटकर 40 से 42 रह गए है।

इस वर्ग ने 35 से ज्यादा सालों के शिक्षण अनुभव को आधार मानते हुए प्राथमिक पाठशालाओं में नर्सरी टीचर्स के पद पर समायोजित किए जाने की वकालत की है। जानकारी के मुताबिक पिछले साढ़े तीन दशक से भी अधिक समय से महिला कर्मी हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद में बालसेविकाओं के रूप में कार्यरत है और जिन पदों पर यह कार्यरत हैं, इनके पास उन पदों के लिए वांछित शिक्षा से भी अधिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त है।

इन बालसेविकाओं को 1983-84 से 1989-90 तक हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित शिशु केंद्रों में बालबाड़ी पोषाहार कार्यक्रम के तहत नियुक्त किया गया था। यह कार्यक्रम 1970-71 में (भारतीय बाल कल्याण परिषद तथा आदिम जाति सेवक संघ) भारत सरकार के माध्यम से चलाया गया जबकि हिमाचल में यह कार्यक्रम 1975 से चलाया गया था।

बालसेविकाओं को एक साल का बालसेविका प्रशिक्षण करवाया गया जो कि शिक्षा विभाग में नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति संख्या सीएचए (7)-2/79 शिक्षा (का) 25 अप्रैल 1981 के अनुसार नर्सरी टीचर्स प्रशिक्षण के समकक्ष है। इसी क्रम में 1983-84 में बालसेविकाओं और नर्सरी टीचर्स को एक साल का कंडेंसड कोर्स करवाकर 1982-83 तक की प्रशिक्षित बालसेविकाओं को जेबीटी पदों पर नियुक्त किया गया था, लेकिन न जाने क्यों 1983-84 के बाद किसी प्रकार का कंडेंसड कोर्स करवाया ही नहीं गया जिसकी वजह से बाकी बालसेविकाओं की पदोन्नति नहीं हो पाई।

बालसेविका एवं सहायिका संघ की प्रदेशाध्यक्ष सुनीता कुमारी शर्मा ने ने बताया कि हिमाचल बाल कल्याण परिषद का संचालन राजय सरकार कर रही है और परिषद में कार्यरत सभी कर्मचारी नियमित हैं, जिनके लिए (आरएंडपी) रूल्ज बने हुए हैं, जबकि इन बालसेविकाओं एवं सहायिकाओं के लिए ऐसा कोई प्रावधान सरकार द्वारा 35-36 साल बीत जाने पर भी नहीं किया गया।

मात्र 1500 से 3000 रूपए की मासिक पगार में परिवार का गुजारा भत्ता चला रही हैं। उन्होंने इस बात पर रोष जताया कि यहां तक कि प्रदेशभर में कार्यरत 53 सेंटर बंद कर दिए गए हैं, जबकि इन केंद्रों में कार्यरत सभी बाल सेविकाएं प्रशिक्षित थी। इन केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं 31 मई 2017 से समाप्त कर दी गई हैं, जबकि सरकार को इनके सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए इनका अन्यत्र समायोजन करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 तक इन केंद्रों की प्रदेश में कुल संख्या 369 थी, जो इस समय कम होते-होते 40-42 रह गई हैं, क्योंकि सेवानिवृति के बाद रिक्त स्थानों पर कोई भी नियुक्ति नहीं की गई है। साथ की कुछ केंद्र 20-25 सालों से सरकारी प्राथमिक पाठशालाओं में चल रहे हैं और नर्सरी स्तर की शिक्षा निष्पादित कर रहे हैं। लिहाजा, बंद किए गए 53 केंद्रों को तुरंत प्रभाव से बहाल कर अन्यत्र समायोजन किया जाए और इन केंद्रों में कार्यरत सहायिकाओं को भी चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति दी जाए। साथ ही सेवानिवृत्त बालसेविकाओं व सहायिकाओं को सेवानिवृति का लाभ प्रदान किया जाए।

उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ग को न्याय प्रदान करने को लेकर आज दिन तक कई बार राजनेताओं और अफसरों से मिलकर गुहार लगाई गई लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो सका। ऐसे में अब न्याय की आस टूटने लगी है। सुनीता शर्मा के अनुसार कोरोना काल में भी कुछेक बालसेविकाओं ने शिशुओं के घर-घर जाकर केंद्र में प्रवेश दिलाकर प्रक्रिया को पूरा किया तथा मुश्किल से (एंड्रॉईड फोन व इंटरनेट) आदि साधन जुटाकर ऑनलाईन पढ़ाई भी करवा रही हंै। ऐसे में सरकार से मांग है कि बालसेविकाओं के लिए ठोस नीति बनाकर और उनके शिक्षण अनुभव को आधार मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिक पाठशालाओं में नर्सरी टीचर्स पदों पर समायोजित किया जाए ताकि इस वर्ग के साथ न्याय हो सके।

हिमाचल प्रदेश बालसेविका व सहायिका संघ की प्रदेशाध्यक्ष सुनीता शर्मा ने कहा कि बालसेविका व सहायिकाओं ने न्याय के लिए हर स्तर पर सरकार व विभाग के समक्ष गुहार लगाई, लेकिन आज दिन तक उस ओर से महज आश्वासनों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। उधर निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग हिमाचल प्रदेश कृतिका कुल्हारी के बताया कि बाल सेविका व सहायिकाएं बाल कल्याण परिषद के तहत कार्यरत हैं। विभाग के पास आज तक इनकी तरफ से कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है। यदि उस ओर से कोई प्रस्ताव विभाग के पास आता है तो उस पर गहन विचार किया जाएगा।