नगरोटा बगवां स्थित ऐतिहासिक मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र को भारत के हेरीटेज मधुमक्खी फार्म में होगा स्तरोन्नत  

नगरोटा बगवां स्थित ऐतिहासिक मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र को भारत के हेरीटेज मधुमक्खी फार्म में होगा स्तरोन्नत  

यंगवार्ता न्यूज़ - कांगड़ा   14-09-2021

प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के नगरोटा बगवां स्थित ऐतिहासिक मधुमक्खी अनुसंधान केंद्र को भारत के हेरीटेज मधुमक्खी फार्म में स्तरोन्नत किया जाएगा।

इसके लिए विश्वविद्यालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को 6.20 करोड़ रुपए की एक मेगा परियोजना प्रेषित की है। इस केंद्र की स्थापना वर्ष 1936 में पंजाब कृषि विभाग के तहत की गई थी।

यह मधुमक्खी पालन के लिए सूचना और तकनीकी जानकारी के लिए एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है और वर्ष 1964 में देश में विदेशी मधुमक्खी ‘एपिस मेलिफेराÓ, जिसे आमतौर पर यूरोपीय मधुमक्खी के रूप में भी जाना जाता है, को भारत में स्थापित करने में यह केंद्र अग्रणी रहा था। 

वैज्ञानिकों ने यूरोपीय मधुमक्खी प्रजाति ‘एपिस मेलिफेरा के बारे में जाना, जो स्वदेशी मधुमक्खी एपिस सेराना की तुलना में 5-10 गुना अधिक शहद का उत्पादन करती हैं।

उसके बाद वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी के आयात के प्रयास शुरू किए और वर्ष 1964 में इस विदेशी मधुमक्खी को देश में स्थापित करने में सफल रहे। किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन को प्राप्त करने के लिए मधुमक्खी पालन में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की काफी संभावनाएं हैं। 

कृषि विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. हरींद्र कुमार चौधरी ने बताया कि यह हेरीटेज फार्म भविष्य में एक आदर्श फार्म होगा, जहां हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त भारत के उत्तर-पश्चिमी हिमालयन व अन्य क्षेत्रों के मधुमक्खी पालकों को सभी आधुनिक अनुसंधान व शिक्षण सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगे। 

जल्द ही इसकी स्वीकृति प्राप्त होने की उम्मीद है, जिससे पूर्ण राज्यत्व स्वर्ण जयंती वर्ष में ही इस पर कार्य शुरू हो सकेगा। प्रदेश में इस विदेशी मधुमक्खी की 84 हजार से अधिक कॉलोनियां हैं, जिनमें सालाना 800-1200 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है। 

राष्ट्रीय स्तर पर पारंपरिक और आधुनिक मधुमक्खी के छत्ते में विदेशी और देशी मधुमक्खियों की लगभग 35 लाख कालोनियों का रख-रखाव किया जाता है, जो 120 हजार मीट्रिक टन से अधिक शहद का उत्पादन करती हैं। जिससे 1.25 हजार करोड़ रुपए मूल्य का 61.4 हजार टन शहद निर्यात होता है।