चार साल फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार , पांचवी बार चमकी किस्मत , रामायण-महाभारत सुनकर मिली IAS बनने की प्रेरणा 

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मुंबई यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री लेकर निकले इस नौजवान के सामने करियर के बेहतरीन मौके थे। कैंपस में प्लेसमेंट चल रहा था और उसके दोस्त शानदार पैकेज पर नौकरी हासिल कर रहे थे। लेकिन उसकी जिद कुछ और थी। उसे बचपन से उसके दादा रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाते आए थे। अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी के भाव उसके अंदर जैसे घुल गए

Jul 6, 2024 - 18:54
Jul 6, 2024 - 19:02
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चार साल फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार , पांचवी बार चमकी किस्मत , रामायण-महाभारत सुनकर मिली IAS बनने की प्रेरणा 


न्यूज़ एजेंसी - नई दिल्ली  06-07-2024

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मुंबई यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री लेकर निकले इस नौजवान के सामने करियर के बेहतरीन मौके थे। कैंपस में प्लेसमेंट चल रहा था और उसके दोस्त शानदार पैकेज पर नौकरी हासिल कर रहे थे। लेकिन उसकी जिद कुछ और थी। उसे बचपन से उसके दादा रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाते आए थे। अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी के भाव उसके अंदर जैसे घुल गए थे। और इसीलिए , जिस वक्त उसके दोस्त मल्टीनेशनल कंपनियों में मोटे पैकेज की नौकरियां पा रहे थे , तो उसने यूपीएससी के जरिए सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया। 
लेकिन ये सब इतना आसान कहां था, यूपीएससी में उसे लगातार चार साल नाकामयाबी का दौर झेलना पड़ा। ये कहानी है मुंबई में रहने वाले स्मित पटेल की, जिनके पिता बेहतर जीवन की तलाश में गुजरात से आकर यहां बस गए थे। स्मित जब छोटे थे तो रात में सोते समय जब तक उनके दादा उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां ना सुनाएं, उन्हें नींद नहीं आती थी। वो कहानियां उनके लिए महज कहानियां नहीं थीं, बल्कि जिंदगी के सबक थे। स्मित के घर के हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे, फिर भी परिवार ने उनकी पढ़ाई को प्राथमिक दी। स्कूली पढ़ाई पूरी हुई तो उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल कर ली। हालांकि, स्मित ने पहले ही ठान लिया था कि वो यूपीएससी की परीक्षा देंगे, इसलिए इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी। 
ये एक बहुत बड़ा फैसला था। इंडियन मास्टरमाइंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मित के दादा गुजरात में रहते हुए स्थानीय चुनावों में काफी एक्टिव रहते थे। उनकी पूरी जिंदगी गुजरात में जिला परिषद स्तर के चुनावों, मिलों और बाकी जगहों पर काम करते हुए गुजरी थी। स्मित के दादा उन्हें बताते थे एक सिविल अधिकारी समाज में कितना असरदार होता है। उसके फैसले किस तरह समाज में बदलाव लाते हैं। यूपीएससी को अपने करियर के तौर पर चुनने की स्मित की एक वजह ये भी थी। हालांकि, उनकी राह मुश्किलों से भरी थी। 2019 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन उन्हें नाकामयाबी मिली। स्मित ने फिर से कोशिश की और अगले साल दोबारा परीक्षा दी , लेकिन इस बार भी नतीजा वही रहा। 2022 तक लगातार वो चार बार फेल हुए। इस दौरान उनके अंदर निराशा भी आई। लगने लगा कि कहीं उन्होंने गलत फैसला तो नहीं ले लिया। लेकिन फिर याद आई अपने दादा की वो कहानियां, जिन्हें सुनकर वो बड़े हुए थे। 
वही रामायण-महाभारत की कहानियां, जिन्होंने उन्हें सिखाया था कि इंसान के हाथ में केवल कोशिश होती है। इसीलिए हर इंसान को सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, परिणाम का फैसला ईश्वर करेगा। पांचवीं बार जब स्मित इंटरव्यू के लिए जा रहे थे, तो उनके दादा ने फिर से उन्हें समझाया कि तुम केवल अपना बेस्ट दो। जीवन में बहुत कुछ ऐसा है, जिस पर हमारा वश नहीं, लेकिन हम हमेशा डर कर नहीं रह सकते। अपनी ऊर्जा का पूरा इस्तेमाल करो और बिना वक्त गंवाए बस अपनी कोशिश में जुटे रहो। स्मित ने साल 2013 में पांचवीं बार यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार जब रिजल्ट आया तो उनकी मेहनत का फल उन्हें मिल गया। स्मित को इस परीक्षा में 562वीं रैंक हासिल हुई। स्मित ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल नहीं है।
 

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