विश्व की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है रामचरितमानस , अनपढ़ व्यक्ति भी समझ जाता है इस ग्रंथ की भाषा : प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह

हिमालय साहित्य संस्कृति मंच, शिमला एवं ओजस सेंटर फॉर आर्ट एण्ड रीडरशिप डेवल्पमेंट (ओकार्ड) इण्डिया, दिल्ली द्वारा शिमला के ऐतिहासिक गेयटी हाल में "कवि दरबार" कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह प्रख्यात साहित्यकार व शिक्षाविद के सानिध्य में हुआ। उन्होनें कहा कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस , तुलसीदास संसार के महान कवि

Jun 22, 2024 - 19:56
Jun 22, 2024 - 19:59
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विश्व की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है रामचरितमानस , अनपढ़ व्यक्ति भी समझ जाता है इस ग्रंथ की भाषा : प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह
  
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला   22-06-2024

हिमालय साहित्य संस्कृति मंच, शिमला एवं ओजस सेंटर फॉर आर्ट एण्ड रीडरशिप डेवल्पमेंट (ओकार्ड) इण्डिया, दिल्ली द्वारा शिमला के ऐतिहासिक गेयटी हाल में "कवि दरबार" कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह प्रख्यात साहित्यकार व शिक्षाविद के सानिध्य में हुआ। उन्होनें कहा कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस , तुलसीदास संसार के महान कवि हैं। तुलसीदास की कालजयी कृति रामचरितमानस को अनपढ़ व्यक्ति भी समझ जाता है और पढ़ा लिखा समझ नहीं पता, यह उसकी विलक्षणता है। प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह ने उपस्थित कवियों को सबक देते हुए कहा कि कविता और गज़ल की व्याख्या करना ऐसा ही है जैसे फूल की पंखुड़ियां नोंच कर मालूम करना कि उसमें से खुशबू कहां से आ रही है। 
उन्होंने कहा कि कविता की कोई निश्चित परिभाषा नही हो सकती है। कालिदास का मेघदूत भी सुंदर गज़ल है। भारत की ज्ञान परंपरा में ऋग्वेद का महत्व निर्विवाद है। दुनिया के सभी धर्म ग्रंथों में ऋग्वेद कवितामय है इससे बड़ी महान कविता विश्व के किसी धर्म ग्रंथ में नहीं है। इस अवसर पर युवा लेखिका जहान्वी का उपन्यास "किरदार-ए-नकाब" का लोकार्पण भी किया गया। कवि दरबार कार्यक्रम का मंच संचालन जगदीश बाली ने किया इसक दौरान लगभग पचास वरिष्ठ नवोदय तथा महिला साहित्यकारों ने अपनी अपनी कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर डॉ. ज्योत्सना मिश्रा ने अपनी कविताओं कविता से सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। आसमानी खिड़कियां है लड़कियां , प्यार के मायने सिखाती लड़कियां। मोहब्बत को छिपा मुट्ठी दबाती लड़कियां , मिले जब प्यार तो आंसू बहाती लड़कियां। कल ही जन्मी आज खेली कल बड़ी हो जाएंगी , घर बसाने के लिए घर छोड़ जाती लड़कियां। 
सेतु पत्रिका के सम्पादक डाॅ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में बेशुमार कविता हो रही है लेकिन इसमें सही में कवि कितने है, यह कहना मुश्किल है। आज तो विचार आया, लिखा और पोस्ट कर दिया। न चिंतन की गहनता और न कथानक की संप्रेषणीयता। छपास की भूख साहित्य को कहीं कमजोर तो नहीं कर रही। इस अवसर पर हिमालय मंच शिमला के अध्यक्ष एस. आर. हरनोट, ओकार्ड इंडिया के निदेशक राकेश गुप्ता, सेतु पत्रिका के सम्पादक डाॅ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता, डाॅ. ज्योत्सना मिश्रा, डॉ. कर्म सिंह, गुलपाल, हितेन्द्र शर्मा, डॉ अनीता शर्मा, कल्पना गांगटा, उमा नधैक, अनिल शर्मा नील, नीता अग्रवाल, लखविंदर सिंह, स्नेहा हरनोट, हेमलता, मनोज शर्मा, जाह्नवी, अतुल, आयुष, स्वप्निल सूर्यान सहित अनेक कवि और कवयित्री उपस्थित रहे।

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