किशाऊ बांध के विरोध में मेलोथ में संघर्ष समिति का गठन , अधिकारों की लड़ाई का ऐलान

उत्तराखंड और हिमाचल के बीच बनने वाले किशाऊ बांध परियोजना का विरोध शुरू हो गया है। प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में रविवार को मेलोथ स्थित महासू देवता मंदिर परिसर में क्षेत्र के लोगों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन किया गया और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया

Jul 20, 2026 - 18:03
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किशाऊ बांध के विरोध में मेलोथ में संघर्ष समिति का गठन , अधिकारों की लड़ाई का ऐलान
यंगवार्ता न्यूज़ - शिलाई  20-07-2026

उत्तराखंड और हिमाचल के बीच बनने वाले किशाऊ बांध परियोजना का विरोध शुरू हो गया है। प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में रविवार को मेलोथ स्थित महासू देवता मंदिर परिसर में क्षेत्र के लोगों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन किया गया और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया। बैठक में श्याम सिंह तोमर को संघर्ष समिति का अध्यक्ष तथा जवाहर सिंह को समिति का संरक्षक नियुक्त किया गया। 
 
 
 
 
इसके अलावा परमेंद्र सिंह तोमर को उपाध्यक्ष , दलीप सिंह तोमर को महासचिव , हरी सिंह तोमर व आत्माराम भारद्वाज को सचिव, राहुल तोमर को कोषाध्यक्ष , केसर सिंह तोमर को कानूनी सलाहकार तथा नरेंद्र सिंह तोमर और चतर सिंह तोमर को मीडिया एवं प्रचार सचिव चुना गया। नवगठित समिति ने स्पष्ट किया कि उसका पहला और प्रमुख रुख किशाऊ बांध परियोजना का विरोध करना है। समिति के अध्यक्ष श्याम सिंह तोमर ने कहा कि संघर्ष समिति का मुख्य उद्देश्य किशाऊ बांध परियोजना से प्रभावित एवं संभावित विस्थापित परिवारों के अधिकारों, हितों तथा वैधानिक दावों की रक्षा करना है। 
 
 
 
 
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार किसी भी परिस्थिति में इस परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो एक विशाल बांध के बजाय 220 मेगावाट क्षमता के तीन छोटे बांध बनाए जाएं। समिति का कहना है कि इससे लोगों का विस्थापन कम होगा, पर्यावरणीय नुकसान सीमित रहेगा तथा स्थानीय जनभावनाओं का भी सम्मान हो सकेगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र के लोगों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। 
 
 
 
 
उन्होंने सरकार से परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों से व्यापक संवाद करने की मांग की। बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और संभावित प्रभावित परिवार मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष समिति के साथ मिलकर आगे की रणनीति पर काम करने का संकल्प लिया।

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