स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीखी उद्यमिता एवं जनरेटिव एआई की तकनीक

जिला उद्योग केंद्र हमीरपुर ने 16 से 18 जुलाई तक यहां खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए तीन दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) आयोजित किया, जिसमें जिले के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की 30 महिलाओं ने भाग लिया

Jul 19, 2026 - 17:16
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीखी उद्यमिता एवं जनरेटिव एआई की तकनीक

यंगवार्ता न्यूज़ - हमीरपुर  19-07-2026
जिला उद्योग केंद्र हमीरपुर ने 16 से 18 जुलाई तक यहां खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए तीन दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) आयोजित किया, जिसमें जिले के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की 30 महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता के विभिन्न आयामों जैसे व्यावसायिक अवसरों की पहचान, बाजार एवं ग्राहक की समझ, लागत निर्धारण, मूल्य निर्धारण, लाभप्रदता, वित्तीय योजना, सरकारी योजनाओं, उद्यम पंजीकरण, डिजिटल उपकरणों तथा व्यवसाय संचालन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।  
 
 
 
 
कार्यक्रम के समापन अवसर पर खंड विकास अधिकारी रजत चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व्यवसायों के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उन्होंने महिलाओं को एआई आधारित डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर अपने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग, ब्रांडिंग तथा ग्राहक तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।  इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर के महाप्रबंधक मनोज कुमार ने उद्योग विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग महिला उद्यमियों और सूक्ष्म उद्यमों को स्थापित एवं विकसित करने के लिए विभिन्न योजनाओं एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने व्यवसायों के विकास में एआई की बढ़ती भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला। कार्यक्रम के तीसरे दिन प्रतिभागियों को जनरेटिव एआई के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। 
 
 
 
 
 
इसमें मोबाइल फोन के माध्यम से उत्पादों की आकर्षक फोटो तैयार करना, पोस्टर एवं सोशल मीडिया सामग्री बनाना, उत्पाद विवरण तैयार करना तथा डिजिटल मार्केटिंग के लिए निःशुल्क एआई टूल्स का उपयोग करना सिखाया गया, ताकि महिलाएं अपने उत्पादों का प्रभावी प्रचार-प्रसार कर सकें। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ाकर बाजार उन्मुख, तकनीक-सक्षम एवं आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में विकसित करना था। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा भविष्य में सीखी गई तकनीकों को अपने व्यवसाय में अपनाने का आह्वान किया गया।

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