हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री प्राइमरी स्कूल/डे-केयर के संचालन को लेकर सख्त नियम किये लागू 

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री प्राइमरी स्कूल/डे-केयर के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से शुक्रवार को राजपत्र में अधिसूचित बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र नहीं चल सकेगा

Mar 28, 2026 - 11:45
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री प्राइमरी स्कूल/डे-केयर के संचालन को लेकर सख्त नियम किये लागू 
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला   28-03-2026

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री प्राइमरी स्कूल/डे-केयर के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से शुक्रवार को राजपत्र में अधिसूचित बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र नहीं चल सकेगा। 

छोटे बच्चों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक आधारित शिक्षा व देख-रेख उपलब्ध करवाने के लिए यह नियम तय किए गए हैं। नए नियमों के तहत सभी प्री प्राइमरी स्कूलों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए सरकार एक माह के भीतर पोर्टल विकसित करेगी। 

पंजीकरण के लिए 15,000 रुपये फीस तय की गई है। इसमें 5,000 रुपये प्रोसेसिंग और 10,000 रुपये पंजीकरण फीस शामिल होगी। आवेदन खारिज होने पर 10,000 रुपये वापस मिलेंगे। निरीक्षण के बाद ही प्रमाण पत्र जारी होंगे। पंजीकरण प्रक्रिया को तीन स्तरों पर रखा गया है।

पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी जांच करेंग। फिर निरीक्षण समिति की ओर से स्थल निरीक्षण होगा। इसके बाद निदेशालय स्तर की समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सभी मानकों को पूरा किया गया तो ही प्रमाण-पत्र जारी होगा, अन्यथा आवेदन रद्द किया जा सकता है। 

यदि किसी नए केंद्र के पास पूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो उसे 6 महीने के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जा सकेगा। इस दौरान केंद्र को सभी मानक पूरे करने होंगे, अन्यथा अनुमति रद्द हो सकती है। रजिस्ट्रेशन समाप्त होने से 6 माह पहले नवीनीकरण आवेदन अनिवार्य होगा।

नवीनीकरण फीस 10,000 रुपये निर्धारित की गई है। सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और विकास को ध्यान में रखते हुए विस्तृत मापदंड भी तय किए हैं। इसके तहत 20 बच्चों के लिए कम से कम 28 वर्गमीटर कक्षा होनी चाहिए। खेल क्षेत्र, शौचालय, रसोई, विश्राम कक्ष अनिवार्य रहेगा। सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार किट, सुरक्षित पेयजल जरूरी रहेगा। 

दिव्यांग बच्चों के लिए रैम्प और बाधा मुक्त प्रवेश होना चाहिए। हर केंद्र में एक माह के भीतर माता-पिता शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन होगा। इसमें 50 फीसदी अभिभावक और 50 फीसदी शिक्षक शामिल होंगे। बच्चों की सुरक्षा और विकास पर निगरानी के लिए हर तीन माह में बैठक करना अनिवार्य होगा।

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