क्षेत्रीय भाषाओं को समझने के लिए उनकी जड़ों तक पहुंचना बहुत आवश्यक : प्रो. बंसल

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं भारतीय भाषा समिति की ओर से डोगरी भाषा में उच्च शिक्षा हेतु पाठ्यपुस्तक विकास पर लेखक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद्मश्री हरमहेन्द्र सिंह बेदी उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. शालिनी और कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने की

Feb 19, 2025 - 11:48
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क्षेत्रीय भाषाओं को समझने के लिए उनकी जड़ों तक पहुंचना बहुत आवश्यक : प्रो. बंसल

यंगवार्ता न्यूज़ - धर्मशाला  19-02-2025

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं भारतीय भाषा समिति की ओर से डोगरी भाषा में उच्च शिक्षा हेतु पाठ्यपुस्तक विकास पर लेखक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद्मश्री हरमहेन्द्र सिंह बेदी उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. शालिनी और कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने की। प्रो. विशाल सूद ने सभी का स्वागत किया और इस दो दिवसीय कार्यशाला के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों से लगभग 20 प्रतिभागी उपस्थित हुए, जिन्हें पाठ्यक्रम विकसित करने से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कुलाधिपति पद्मश्री हरमहेन्द्र सिंह बेदी ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का माध्यम भारतीय भाषाओं को बनाया जाना चाहिए। 
उन्होंने डोगरी भाषा को पंजाबी से जोड़ने, इसे पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने और इसके इतिहास व साहित्य पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति सत प्रकाश बंसल ने भारतीय भाषाओं की विविधता और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान 22 राजभाषाओं का मान्यता देता है, लेकिन यहां हजारों अन्य भाषाएं तथा लाखों बोलियां बोली जाती हैं।  यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी नागरिकों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले। त्रिभाषा और बहुभाषा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कई पहल की गई हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डिजिटलीकरण और शब्दावली की कमी जैसी चुनौतियों का सामना किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद इन भाषाओं को सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, और अन्य शैक्षिक क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सामुदायिक जुड़ाव और बुजुर्गों के साथ बैठकर लिखने जैसी ग्रास रूट स्तर की गतिविधियों के माध्यम से वास्तविक जीवन केस स्टडी तैयार करनी चाहिए, केवल खानापूर्ति कर हम भाषाओं का विकास नहीं कर सकते। 
विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. शालिनी ने सभी को प्रोत्साहित करने के लिए अस्मिता प्रोजेक्ट का उल्लेख किया। उन्होंने शैक्षणिक लेखन में अध्ययन सामग्री, नोडल यूनिवर्सिटी की भूमिका, और डोगरी भाषा की कठिनाइयों पर अपने विचार साझा किए। उल्लेखनीय है कि डोगरी भाषा में पाठ्यक्रम विकसित करने को लेकर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा प्रबंधन विषयों में प्रशिक्षण दिया जाना है, जिसके पहले चरण की शुरुआत मंगलवार को हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि के कैंपस में हुआ। इसी कड़ी में दो और प्रशिक्षण का आयोजन 24 और 25 फरवरी को जम्मू में किया जाना है। कार्यक्रम के अंत में विवि के कुलसचिव प्रो. सुमन शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मौके पर अधिष्ठाता, अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार, शोध निदेशक प्रो. प्रदीप नायर, प्रो. विशाल सूद, डॉ नरेश सहित विभिन्न संकायों के डीन, प्रोफेसर, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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