एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसों से सफर हुआ आरामदायक, 24 दिन में 19,31,955 रुपए का शुद्ध मुनाफा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरगामी सोच से प्रदेश में स्वच्छ और हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की पहल के सुपरिणाम अब मंडी में भी नजर आ रहे हैं। जिला के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। इनके संचालन से जहां यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर की सुविधा मिल रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आय बढ़ाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

Sep 20, 2026 - 14:05
 0  23
एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसों से सफर हुआ आरामदायक, 24 दिन में 19,31,955 रुपए का शुद्ध मुनाफा

यंगवार्ता न्यूज - मंडी 20 सितंबर :

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरगामी सोच से प्रदेश में स्वच्छ और हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की पहल के सुपरिणाम अब मंडी में भी नजर आ रहे हैं। जिला के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। इनके संचालन से जहां यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर की सुविधा मिल रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आय बढ़ाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

प्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से निगम की परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इससे ऊर्जा लागत में लगभग 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर तक की बचत हो रही है। ईंधन एवं परिचालन व्यय में कमी के साथ-साथ इससे सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की समग्र दक्षता में भी सुधार हो रहा है।

*महत्वपूर्ण रूट पर मिल रही इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा*

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 17 अगस्त को वर्चुअल माध्यम से मंडी जिला को 25 ई-बसों की सौगात दी थी। इसके बाद जिला में नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अनेक महत्वपूर्ण रूट पर किया जा रहा है। इनमें लंबी दूरी की मंडी-शिमला, मंडी-पालमपुर, मंडी-शिमला-तुलाह, मंडी-चंडीगढ़ के साथ ही लोकल रूट मंडी-सुंदरनगर, मंडी-बटाहर, मंडी-तांदी, मंडी-पाली, मंडी-रोपा, मंडी-रिवालसर-नैनादेवी, मंडी-कोट, मंडी-कोटली, मंडी-माहन तथा मंडी-दुर्गापुर इत्यादि शामिल हैं।

*यात्रियों को भा रही शांत और आरामदायक सवारी*

इलेक्ट्रिक बसों को लेकर यात्रियों में उत्साह है। मंडी के ज्वालापुर निवासी इंद्र ठाकुर ने मंडी से शिमला की यात्रा इलेक्ट्रिक बस में की और अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफर बहुत अच्छा और आरामदायक रहा। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। राज्य सरकार का यह प्रयास सराहनीय है, इसके लिए मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार।

वंशिका जम्वाल ने मंडी से दुर्गापुर रूट पर इलेक्ट्रिक बस में सफर को सुखद अनुभव बताया। यह बस सामान्य बसों की तुलना में काफी बेहतर है और सीटें भी आरामदायक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और अधिक रूट पर किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को आरामदायक और पर्यावरण अनुकूल सफर की सुविधा मिल सके।

वहीं जसवंत कुमार ने मंडी से तुलाह तक इलेक्ट्रिक बस में सफर पर कहा कि बस में बैठने के बाद किसी तरह का शोर महसूस नहीं होता और यात्रा काफी आरामदायक रहती है। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

कोटली निवासी किरण राणा ने इलेक्ट्रिक बसों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने आम जनता के लिए बहुत अच्छी सुविधा प्रदान की है। सीटें आरामदायक होने से यात्रा अनुभव बेहतर हो जाता है।

*मंडी इकाई में ₹11.34 लाख की बचत*

निगम  के बेड़े में शामिल पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें अब मुनाफे का सौदा साबित हो रही हैं। हरित राज्य के संकल्प को गति देते हुए निगम की मंडी और सुंदरनगर इकाइयों ने इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से महज 24 दिनों के भीतर लाखों रुपये की बड़ी वित्तीय बचत दर्ज की है। निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के अनुसार, 17 अगस्त, 2026 से 10 सितम्बर, 2026 की अवधि में दोनों डिपो में इलेक्ट्रिक बसों का प्रदर्शन शानदार रहा है।

मंडी डिपो के तहत इस अवधि में 60,060 किलोमीटर की दूरी इन 15 बसों ने तय की, जिस पर कुल चार्जिंग खर्च 7,95,795 रुपए आया।  इन्हीं रूटों पर पहले पारंपरिक डीजल बसें चलाई जा रही थी, तो इतने ही दूरी पर ईंधन का कुल खर्च 19,30,055 रुपए बैठ रहा था। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से मंडी इकाई को 11,34,260 रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है।

*सुंदरनगर इकाई में भी चमका राजस्व*

सुंदरनगर डिपो में भी 10 इलेक्ट्रिक बसों ने कुल 35,044 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान बिजली चार्जिंग पर मात्र 2,10,037 रुपए का खर्च आया, जबकि डीजल बसों के संचालन पर ईंधन का व्यय 10,07,732 रुपए हो रहा था। सुंदरनगर इकाई को भी 7,97,695 रुपए का बंपर लाभ प्राप्त हुआ है।

*पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता*

निगम प्रबंधन के मुताबिक, दोनों इकाइयों को मिलाकर निगम ने इस अल्प अवधि में कुल 19,31,955 रुपए की बचत की है। डीजल के मुकाबले बिजली की कम लागत और शून्य प्रदूषण के कारण ये बसें पर्यावरण अनुकूल भी साबित हो रही हैं। निगम का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा बढ़ाना है।

*चार्जिंग ढांचा भी हो रहा मजबूत*

इलेक्ट्रिक बसों के सुचारू संचालन के लिए जिले में चार्जिंग अवसंरचना को भी विकसित किया जा रहा है। मंडी बस स्टैंड और मंडी वर्कशॉप तथा सुंदरनगर बस स्टैंड में चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं, जबकि जंजैहली में प्रस्तावित है। चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

*पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम*

इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार केवल परिवहन सुविधा में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। इन बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन कम करने, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ एवं हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

src="https://sgp1.digitaloceanspaces.com/cdn.iqwing.co.in/uploads/Deeserve%20Media%202.2_.jpg" width="500" height="900" alt="Deeserve Media Poster" loading="lazy" />
src="https://sgp1.digitaloceanspaces.com/cdn.iqwing.co.in/uploads/Deeserve%20Media%202.2_.jpg" width="340" height="600" alt="Deeserve Media Poster" loading="lazy" />