एड्स से प्रभावित बच्चों को जिला प्रशासन उपलब्ध करवा रहा हर प्रकार की सहायता : उपायुक्त 

जिला सामुदायिक संसाधन समूह की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित की गई। इस बैठक में एचआईवी,  एड्स से जुड़े अभियानों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई

Jan 20, 2026 - 19:38
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एड्स से प्रभावित बच्चों को जिला प्रशासन उपलब्ध करवा रहा हर प्रकार की सहायता : उपायुक्त 

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला   20-01-2026

जिला सामुदायिक संसाधन समूह की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित की गई। इस बैठक में एचआईवी,  एड्स से जुड़े अभियानों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। एड्स से प्रभावित बच्चे सीएबीए (चिल्ड्रन एफेक्टड बाय  एड्स) के मामलों की समीक्षा भी गई है। इसमें 0-18 आयु वर्ष के बच्चों को शामिल किया जाता है।  

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला में 31 बच्चे इससे संक्रमित है। भारत सरकार और नाको (National AIDS Control Organisation) इन बच्चों की मदद के लिए विशेष कदम उठाते हैं। एचआईवी/एड्स अधिनियम के तहत इन बच्चों की संपत्ति के अधिकारों की रक्षा की जाती है ताकि उनके साथ भेदभाव न हो। 

सरकारी केंद्रों पर इन बच्चों के लिए एआरटी (Antiretroviral Therapy) और अन्य दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। स्वास्थ्य केंद्रों को इन बच्चों की पहचान गुप्त रखनी होती है ताकि उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना न करना पड़े। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इनकी निगरानी निरंतर की जाती है। इसके साथ ही अन्य सभी प्रकार की सहायता प्रशासन की ओर से उक्त बच्चों को मुहैया करवाई जा रही है।

जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की बैठक आयोजित की गई। जिला में एचआईवी पॉजिटिव मामलों की संख्या 333 है। एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने के लिए भी कार्य करती है। यह लोगों को यह संदेश देती है कि एड्स छुआछूत की बीमारी नहीं है और संक्रमित व्यक्तियों के साथ सहानुभूति और सहयोग आवश्यक है। 

इस प्रकार यह समिति स्वस्थ, जागरूक और सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उपायुक्त ने कहा कि जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति के तहत जिला सामुदायिक संसाधन समूह कार्य कर रहा है। इसके तहत विभिन्न एनजीओ के माध्यम से प्रभावितों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

प्रदेश और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ प्रभावितों को जोड़ते हुए स्वरोजगार के साधन विकसित करने के लिए मंच प्रदान किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 50 को टेलरिंग का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही 20 को कम्प्यूटर कोर्स करवाया गया है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के माध्यम से भी प्रशिक्षण दिया जा  रहा है।

अनुपम कश्यप ने कहा कि नशे के आदी युवाओं में एचआईवी के लक्षण देखने को मिल रहे है। सिरिंज का इस्तेमाल करके नशा लेने वाले युवा एचआईवी ग्रसित हो रहे हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय है कि सिरिंज के माध्यम से एचआईवी फैल रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि एचआईवी टेस्ट समय-समय पर करवाना चाहिए। 

इसके अलावा नशे के आदी युवा भी फैलते एचआईवी को लेकर सर्तक रहे। बच्चों के अभिभावक पूरी निगरानी रखे कि आपके बच्चे के पास सिरिंज आदि तो नहीं है। एचआईवी का अगर सही समय पर पता चल जाए और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार परहेज और दवा ली जाए तो व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है।

बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, जिला एड्स प्रोग्राम अधिकारी डॉ. तहसीन, जिला टीबी प्रोग्राम अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल, प्रोजेक्ट मैनेजर दीपिका विमल, मेडिकल अफसर डॉ. निधि सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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