शिलाई में सैकड़ों हरे पेड़ों पर चली आरी , 25 पेड़ों की परमिशन की आड़ में काट दिए 307 पेड़ 

सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने से हरकत में आया वन विभाग भाजपा - कांग्रेस ने एक दूसरे पर लगाए आरोप पूर्व विधायक बलदेव तोमर बोले मंत्री की शय पर चल रहा माफिया राज उद्योग मंत्री का बयान वन कटान मामले में कांग्रेस के लोग नहीं है शामिल

Mar 6, 2026 - 20:33
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शिलाई में सैकड़ों हरे पेड़ों पर चली आरी , 25 पेड़ों की परमिशन की आड़ में काट दिए 307 पेड़ 
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  06-03-2026
जिला सिरमौर के शिलाई में अवैध वन कटान का एक मामला सामने आया है , जिससे न केवल  राजनीति गरमा गई है , बल्कि आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक मामला शिलाई नगर पंचायत के क्षेत्र का है। जहां दिन दहाड़े शिलाई के ही भूमि मालिक ने बिना परमिशन के 300 से अधिक पेड़ों को काट डालें। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जहां भूमि के मालिक सामने आए , वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने भी बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे प्रकरण से पर्दा उठाया। यही नहीं सिरमौर प्रवास के दौरान उद्योग मंत्री एवं स्थानीय विधायक हर्षवर्धन चौहान ने भी इस मामले को लेकर अपना बयान जारी किया। 

25 पेड़ों को काटने की थी परमिशन , काटे 307 पेड़ 
गौर हो की शिलाई नगर पंचायत के तहत आने वाले क्षेत्र में नेशनल हाईवे के साथ पेट्रोल पंप के समीप  कुछ लोगों द्वारा अपनी निजी जमीन पर हरे पेड़ काटे गए। बताते हैं कि उक्त परिवार के पास केवल मात्र 25 पेड़ों को काटने की परमिशन थी , लेकिन 25 पेड़ों की परमिशन की आड़ में उक्त परिवार ने 300 से अधिक पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी।
 
क्या ? कहते है पेड़ कटान करने वाले भूमि मालिक
 
 वीडियो वायरल होने के बाद भूमि मालिक रंजीत नेगी ने शिलाई में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी। रंजीत नेगी ने बताया कि उनके परिवार और अन्य 11 लोगों ने अपनी निजी जमीन पर पेड़ काटने की परमिशन ली गई थी। रंजीत नेगी ने कहा कि उनके पास भी 25 पेड़ों को काटने की परमिशन थी , जबकि अन्य लोगों के पास भी पेड़ों को काटने की परमिशन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक बलदेव तोमर द्वारा उछाला जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलदेव तोमर के ही परिवार ने उनकी निजी जमीन पर कब्जा कर पेट्रोल पंप लगाया है। 

क्या ? कहते है भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक बलदेव 

उधर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने पांवटा साहिब में पत्रकार वार्ता कर मामले की जानकारी दी। बलदेव तोमर ने कहा कि जिन लोगों ने 300 से अधिक पेड़ धराशाई किए हैं उनके पास केवल मात्र 25 पेड़ों को काटने की ही परमिशन थी। उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वन मंडल अधिकारी अपने स्तर पर 10 से 15 पेड़ों को काटने की ही परमिशन दे सकता है। बावजूद इसके भी पेड़ काटने वाले लोग 25 पेड़ों को काटने की परमिशन का दावा कर रहे हैं। बलदेव तोमर ने आरोप लगाया की शिलाई में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की शय पर पहले खनन माफिया और अब बन माफिया सक्रिय हो गया है। उन्होंने कहा कि उद्योग मंत्री के करीबी और पूर्व में पंचायत समिति सदस्य रहे रंजीत नेगी और उनके परिवार ने बिना परमिशन के सैकड़ों पर काट दिए हैं। 
हरकत में आया वन विभाग , शुरू की पेड़ों की गिनती 

मीडिया में मामला आने के बाद शुक्रवार को वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और टीम ने पेड़ों की गिनती की। साथ ही जो पेड़ काटे गए हैं उनके तनों को भी मार्क किया गया है। बताते हैं कि वन विभाग के मुताबिक उक्त स्थान पर 307 पेड़ काटे गए हैं। भले ही अभी तक वन विभाग द्वारा पुलिस में मामला दर्ज नहीं करवाया है , लेकिन सूत्रों का कहना है कि वन विभाग शीघ्र ही पुलिस में मामला दर्ज करवा रहा है। 
 
क्या ? कहते है उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान

उधर इस बारे में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना परमिशन के पेड़ों का अवैध कटान नहीं कर सकता है चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से संबंध रखता हो। वहीं उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक बलदेव तोमर पर भी आरोप लगाया कि उनके परिवार ने शिलाई में जमीन पर अवैध कब्जा कर पेट्रोल पंप लगाया है। हर्षवर्धन चौहान ने तो यह भी बताया की शिलाई में जो पेड़ काटे गए हैं। उसमें कोई भी कांग्रेस का कार्यकर्ता शामिल नहीं है , बल्कि इस पेड़ कटान में भी भाजपा के कुछ लोग शामिल है। 
निजी भूमि पर पेड़ों के कटान का क्या है नियम 

भले ही इस कटान को लेकर राजनीति शुरू हो गई है , लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कोई भी व्यक्ति निजी और सरकारी जमीन पर बिना परमिशन के कोई भी हरा पेड़ नहीं काट सकता है। जानकार बताते हैं कि वन परिक्षेत्र यानी रेंज ऑफिसर पांच पेड़ों की परमिशन , जबकि वन मंडल अधिकारी 10 पेड़ों तक की परमिशन दे सकता है। 10 से 15 पेड़ों को काटने की परमिशन कंजरवेटर द्वारा दी जाती है। यदि 15 पेड़ों से अधिक पेड़ों का कटान होना है तो यह मामला प्रदेश स्तर पर जाता है जिसके लिए पीसीसीएफ से परमिशन मिलती है। अब देखना यह है की सिलाई में हुए इस चट्टान को लेकर वन विभाग आगे क्या कार्रवाई अमल में लाता है। 

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