यंगवार्ता - हमीरपुर 6 नवंबर :
दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपरा और जीवन में नई आशाओं के संचार का महापर्व है। यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की ओर तथा नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। घर-आंगन में जगमगाते दीपक, रंग-बिरंगी रोशनी, पूजा-अर्चना, मिठाइयों की मिठास और अपनों के साथ खुशियां बांटने का यह अवसर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में नई उमंग और उत्साह लेकर आता है। दीपावली का वास्तविक संदेश केवल अपने घरों को रोशन करना नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का प्रकाश फैलाना है। यह पर्व हमें प्रेम, सद्भाव, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास करवाता है। इस पावन अवसर पर मैं समस्त देशवासियों को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। ईश्वर से कामना है कि प्रकाश का यह पर्व प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। हालांकि, त्योहारों की खुशियों के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू ऐसा भी है, जिसे अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं—वह है हमारी सुरक्षा। दीपावली के दौरान दीपक, मोमबत्तियों, विद्युत सजावट और पटाखों के असावधानीपूर्वक उपयोग से आग लगने, जलने, दुर्घटनाओं तथा अन्य आपातकालीन घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। कई बार छोटी-सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है और पलभर में त्योहार की खुशियां मातम में बदल जाती हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम उत्सव के साथ-साथ सुरक्षा को भी समान महत्व दें।दीपावली पर पटाखे चलाने का उत्साह विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में देखने को मिलता है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को पटाखों से जुड़े संभावित खतरों के प्रति जागरूक करें। पटाखे हमेशा खुले एवं सुरक्षित स्थान पर ही चलाएं। केवल अधिकृत विक्रेताओं से निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पटाखे खरीदें तथा प्रतिबंधित पटाखों के उपयोग से बचें। पटाखे जलाते समय सूती एवं शरीर से सटे हुए कपड़े पहनें। बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न चलाने दें। पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाने, जलते हुए पटाखों के ऊपर झुकने अथवा उन्हें किसी व्यक्ति, वाहन या भवन की ओर फेंकने जैसी लापरवाही बिल्कुल न करें। यदि कोई पटाखा जलने के बाद नहीं फूटता है तो उसके पास तुरंत न जाएं और उसे दोबारा जलाने का प्रयास न करें। पटाखे चलाने के दौरान पास में पानी से भरी बाल्टी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अवश्य रखें। दीपावली पर घरों को दीपों, मोमबत्तियों और विद्युत लड़ियों से सजाने की परंपरा है। लेकिन सजावट के दौरान थोड़ी-सी असावधानी भी आग लगने का कारण बन सकती है। दीपक एवं मोमबत्तियां पर्दों, कपड़ों, कागज, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। जलते हुए दीपकों को लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें। विद्युत सजावट के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली लाइटों और सुरक्षित वायरिंग का ही उपयोग करें। एक ही सॉकेट पर अत्यधिक विद्युत उपकरण लगाने से बचें। टूटे हुए स्विच, खुले तार और खराब प्लग का उपयोग न करें। घर से बाहर जाते समय अनावश्यक विद्युत उपकरणों को बंद कर दें। विशेष रूप से रात्रि में सोने से पहले यह सुनिश्चित करें कि सभी दीपक, मोमबत्तियां और गैस उपकरण सुरक्षित रूप से बंद हैं। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में घबराने के बजाय संयम और समझदारी से काम लेना चाहिए। घर या आसपास आग लगने की स्थिति में सबसे पहले स्वयं एवं परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। आग पर काबू पाना संभव न हो तो तुरंत अग्निशमन विभाग को सूचना 101 और 112 नंबर पर तुरंत दें। बिजली से संबंधित आग लगने की स्थिति में मुख्य विद्युत आपूर्ति बंद करें और ऐसी आग पर पानी डालने से बचें। पटाखों अथवा आग से जलने की स्थिति में प्रभावित हिस्से को सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखें। जले हुए स्थान पर बर्फ, टूथपेस्ट, तेल या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं। गंभीर रूप से जलने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें। याद रखें, आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर उठाया गया सही कदम किसी की जान बचा सकता है। दीपावली का आनंद तभी सार्थक है, जब हमारी खुशियों से किसी दूसरे को परेशानी न हो। पटाखों से निकलने वाला धुआं और अत्यधिक ध्वनि बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीमार व्यक्तियों तथा पशु-पक्षियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहते हुए अनावश्यक शोर और प्रदूषण से बचना चाहिए। विशेष रूप से अस्पतालों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, पेट्रोल पंपों, गैस गोदामों और ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण वाले स्थानों के आसपास पटाखे चलाने से बचें। अपने पालतू पशुओं एवं आसपास रहने वाले बेजुबान जानवरों का भी ध्यान रखें। त्योहार के बाद पटाखों के अवशेषों को पूरी तरह ठंडा होने पर ही सुरक्षित तरीके से निस्तारित करें। आपदा प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है—आपदा आने से पहले तैयारी और जोखिम को कम करने के लिए समय रहते सावधानी। हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक दुर्घटना केवल प्रशासन या संबंधित विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत एवं सामूहिक जागरूकता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर, कार्यस्थल और आसपास के वातावरण में सुरक्षा के प्रति सजग रहे तो अनेक संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। दीपावली हमें प्रकाश का महत्व समझाती है। जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक अंधकार को दूर कर सकता है, उसी प्रकार हमारी छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सकती हैं। इस दीपावली पर क्यों न हम एक संकल्प लें कि अपने घर में खुशियों के दीप जलाने के साथ-साथ सुरक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता का दीप भी प्रज्वलित करेंगे। आइए, इस दीपावली पर हम केवल अपने घरों को ही नहीं, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार को भी प्रकाशमय बनाएं। खुशियां बांटें, जरूरतमंदों की सहायता करें, पर्यावरण का सम्मान करें और सुरक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं। आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! ईश्वर करे कि यह पर्व आपके जीवन में नई उम्मीदों, असीम खुशियों और समृद्धि का प्रकाश लेकर आए। याद रखें—दीपावली की असली चमक पटाखों की आवाज में नहीं, बल्कि सुरक्षित परिवारों की मुस्कान में है।