बागवान कैसे करें सेब रोग प्रबंधन की जानकारी , कृषि विज्ञान केंद्र ने लगाया   जागरूकता शिविर 

कृषि विज्ञान केंद्र चम्बा के तत्वावधान तथा उद्यान विभाग के सहयोग से जिले के बागवानों को सेब फसल में रोग प्रबंधन से संबंधित जागरूकता प्रदान करने के उद्देश्य से क्रियान्वित किए जा रहे विशेष अभियान की निरंतरता में आज जनजातीय उपमंडल भरमौर की उपतहसील होली के लामू गांव में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जया चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि विशेष अभियान का उद्देश्य बागवानों को सेब फसल में उत्पन्न होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान, रोकथाम एवं वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाना है

Feb 11, 2026 - 19:12
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बागवान कैसे करें सेब रोग प्रबंधन की जानकारी , कृषि विज्ञान केंद्र ने लगाया   जागरूकता शिविर 
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - चम्बा  11-02-2026
कृषि विज्ञान केंद्र चम्बा के तत्वावधान तथा उद्यान विभाग के सहयोग से जिले के बागवानों को सेब फसल में रोग प्रबंधन से संबंधित जागरूकता प्रदान करने के उद्देश्य से क्रियान्वित किए जा रहे विशेष अभियान की निरंतरता में आज जनजातीय उपमंडल भरमौर की उपतहसील होली के लामू गांव में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जया चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि विशेष अभियान का उद्देश्य बागवानों को सेब फसल में उत्पन्न होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान, रोकथाम एवं वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाना है। उन्होंने बताया कि शिविर के माध्यम से बागवानों को सेब फसल के समुचित प्रबंधन के साथ-साथ अल्टरनेरिया एवं मार्सोनिना लीफ ब्लॉच जैसे प्रमुख रोगों की प्रभावी रोकथाम के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। 
उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से डॉ. सुशील धीमान तथा उद्यान विभाग के प्रसार अधिकार पंकज कुमार ने शिविर में उपस्थित बागवानों को महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रदान की। शिविर के दौरान विशेषज्ञों अधिकारियों ने बताया कि समय रहते वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से न केवल फसल को रोगों से बचाया जा सकता है बल्कि उत्पादन एवं गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है, जिससे बागवानों को उनकी उपज के बेहतर दाम प्राप्त होंगे। उन्होंने सेब की फसल से संबंधित रोगों की पहचान, दवाइयों के संतुलित उपयोग, छिड़काव की सही विधि एवं समय-निर्धारण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शिविर के दौरान अधिकारियों ने फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा सतत कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। बागवानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा बागों की नियमित निगरानी के प्रति जागरूक किया गया। 
साथ ही उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र चम्बा से निरंतर संपर्क बनाए रखने और नवीन तकनीकी अनुशंसाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी द्वारा अनुशंसित छिड़काव कार्यक्रम (स्प्रे शेड्यूल) का कड़ाई से पालन करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित स्प्रे शेड्यूल का पालन करने से बागवान अपनी फसल के बेहतर आकार, गुणवत्ता एवं उत्पादन को सुनिश्चित कर सकते हैं। इस दौरान बागवानों से शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने तथा विशेषज्ञों द्वारा दिए गए वैज्ञानिक परामर्श एवं अनुशंसित विधियों को अपनाने की अपील की गई। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी (बृहस्पतिवार) को अभियान के तहत अगला जागरूकता शिविर उपमंडल चुराह के मदन गांव में आयोजित किया जाएगा।

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