हाब्बी मानसिंह कला केंद्र में हुआ आभारोत्सव का आयोजन, जालग घाटी में कला प्रेमियों और सहयोगियों के सम्मान में आयोजित हुआ उत्सव
राजगढ़ की पझौता घाटी के गांव जालग स्थित हाब्बी मानसिंह कला केंद्र में गत दिवस आभारोत्सव का आयोजन किया गया। हाब्बी मानसिंह कला केंद्र के सह प्रभारी एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा कलाकार गोपाल हाब्बी ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि यह उत्सव डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी को हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के लंबे सांस्कृतिक सफर में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले कलाकारों, संस्कृति कर्मियों, साहित्यकारों, अधिकारियों, बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
यंगवार्ता न्यूज - राजगढ़ 17 सितंबर :
राजगढ़ की पझौता घाटी के गांव जालग स्थित हाब्बी मानसिंह कला केंद्र में गत दिवस आभारोत्सव का आयोजन किया गया। हाब्बी मानसिंह कला केंद्र के सह प्रभारी एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा कलाकार गोपाल हाब्बी ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि यह उत्सव डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी को हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के लंबे सांस्कृतिक सफर में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले कलाकारों, संस्कृति कर्मियों, साहित्यकारों, अधिकारियों, बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी तथा सेवानिवृत्त निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ लोक कलाकार एवं साहित्यकार विद्यानंद सरैक ने की। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में ज्ञानचंद गर्ग, सेवानिवृत्त द्वितीय सचिव शिक्षा, भारतीय दूतावास अफगानिस्तान एवं वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक, आईसीसीआर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. हुकुम शर्मा, बाबूराम चौहान, जयप्रकाश चौहान, मदन हिमाचली, दिलीप विशिष्ट, जगमोहन मेहता, प्रेमपाल आर्य, शकुंतला प्रकाश, शेरजंग चौहान तथा यशपाल कपूर सहित संस्कृति, साहित्य और लोक विधाओं से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
आभारोत्सव के दौरान हाब्बी मानसिंह कला केंद्र की ओर से 200 से अधिक कलाकारों, लेखकों, साहित्यकारों, अधिकारियों, संस्कृति कर्मियों और कला प्रेमियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सांस्कृतिक यात्रा शून्य से शुरू हुई और आज तक के इस सफर में अनेक लोगों का सहयोग, मार्गदर्शन और प्रेरणा उन्हें प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित विभिन्न उपलब्धियां किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सांस्कृतिक दल के कलाकारों की मेहनत, गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन तथा अधिकारियों, संस्कृति कर्मियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ कलाकारों और दर्शकों के निरंतर प्रोत्साहन का परिणाम हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम शर्मा ने कहा कि डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी ने लंबे समय से लोक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. हाब्बी की मेहनत और कार्यशैली को उन्होंने करीब से देखा है। पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने डॉ. हाब्बी के साथ अपने लंबे सांस्कृतिक जुड़ाव तथा उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई विभिन्न लोक विधाओं की जानकारी साझा की।
सोलन जिला के लेखक एवं साहित्यकार मदन हिमाचली ने कहा कि डॉ. हाब्बी ने पारंपरिक लोक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं तथा देश-विदेश में हिमाचल की लोक संस्कृति को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्कृति दल के वरिष्ठ कलाकार रामलाल वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह पिछले लगभग 30–35 वर्षों से डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी की सांस्कृतिक यात्रा के साक्षी रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. हाब्बी ने कभी व्यक्तिगत सम्मान को प्राथमिकता नहीं दी और कई अवसरों पर स्वयं सम्मान लेने के बजाय सांस्कृतिक दल के वरिष्ठ कलाकार को भेजा।
संस्था की वरिष्ठ महिला कलाकार सरोज कुमारी ने हाब्बी मानसिंह कला केंद्र की विभिन्न गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर माननेश्वर लोक वाद्य दल के कलाकारों ने पारंपरिक लोक वाद्य वादन की प्रस्तुति दी। जिला सिरमौर के प्रसिद्ध लोक गायक धर्मपाल ठाकुर एवं उनके साथियों ने नाटियों की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
आभारोत्सव में सिरमौर, सोलन और शिमला जिलों के कलाकारों एवं कला प्रेमियों के अलावा जालग, द्राबला, शलहेच, नरोट, रोहड़ी, रिटब, हाब्बन तथा आसपास के कई गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में लोक संस्कृति, कला और साहित्य से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
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