प्रदेश में कानून व्यवस्था, वित्त और प्रशासनिक मोर्चे पर पूर्ण विफलता,कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को कर्ज और अव्यवस्था में धकेला”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वर्तमान प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन और पूर्ण राज्यत्व प्राप्ति के बाद अनेक सरकारें आईं, परंतु वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सवा तीन वर्षों में प्रदेश को आर्थिक, प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर संकट

Feb 11, 2026 - 11:44
Feb 11, 2026 - 11:45
 0  10
प्रदेश में कानून व्यवस्था, वित्त और प्रशासनिक मोर्चे पर पूर्ण विफलता,कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को कर्ज और अव्यवस्था में धकेला”
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media

अपव्यय, सलाहकारों-एडवाइजर्स की फौज, बढ़ते माफिया और रुके विकास कार्य  

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    11-02-2026

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वर्तमान प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन और पूर्ण राज्यत्व प्राप्ति के बाद अनेक सरकारें आईं, परंतु वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सवा तीन वर्षों में प्रदेश को आर्थिक, प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर संकट में खड़ा कर दिया है। 

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में हालात ऐसे बन गए हैं कि हत्या, लूट, फिरौती, डकैती और नशे का जाल लगातार फैल रहा है तथा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में युवा नशे की चपेट में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन माफिया और वन माफिया पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं, जिससे सरकार को मिलने वाला राजस्व भारी मात्रा में प्रभावित हो रहा है। 

कांगड़ा, चंबा, मंडी, सोलन सहित कई जिलों में अवैध खनन और वन कटान के मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी उजागर की है। वन अधिकारियों पर हमलों की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कानून का डर समाप्त हो चुका है। डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार ने संसाधन बढ़ाने के बजाय कर्ज बढ़ाने की नीति अपनाई है। 

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “कर्जा लेकर घी पियो” की नीति पर सरकार चल रही है। प्रदेश में एडवाइजर, ओएसडी और विशेष पदों पर नियुक्तियों की बड़ी फौज खड़ी कर दी गई है, जिनकी संख्या लगभग 70–75 तक पहुंच चुकी है और जिन पर भारी वेतन, वाहन, आवास और अन्य सुविधाओं के रूप में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।

गैरकानूनी रूप से नियुक्त किए गए मुख्य संसदीय सचिव (CPS) मामले में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद पद हटाने पड़े, लेकिन तब तक करोड़ों रुपये का व्यय हो चुका था और अब भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में महंगे वकीलों पर भारी खर्च किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने 100 से अधिक अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ताओं व अन्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति की है और गंभीर मामलों में अलग से महंगे वरिष्ठ वकील खड़े किए जा रहे हैं, जिससे करोड़ों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि निगम-बोर्डों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की नियुक्तियों में भारी बढ़ोतरी हुई है और यह “मित्रों की सरकार” बनकर रह गई है, जहां योग्यता के बजाय नजदीकी आधार बन गई है। उन्होंने सरकारी होर्डिंग, प्रचार अभियानों, बड़े काफिलों, नई गाड़ियों और हेलीकॉप्टर उपयोग पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि वित्तीय संकट का हवाला देने वाली सरकार अपने खर्चों में कटौती करती दिखाई नहीं देती।

डॉ. बिंदल ने कहा कि चुनाव से पहले दी गई गारंटियां — ₹1500 मासिक सहायता, मुफ्त बिजली, एक लाख सरकारी नौकरियां — बिना वित्तीय गणना के घोषित की गईं और अब सरकार स्वयं वित्तीय संकट की बात कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के डीए, पेंशन, रिटायरमेंट लाभ और सामाजिक योजनाओं के भुगतान में देरी इसी कुप्रबंधन का परिणाम है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में हिमाचल को पूर्व की तुलना में कई गुना अधिक सहायता दी है, टैक्स डिवोल्यूशन बढ़ा है और सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट केंद्र प्रायोजित योजनाओं से चल रहे हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से कितने बड़े विकास कार्य शुरू किए।

डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान वित्तीय अव्यवस्था के लिए पूरी तरह राज्य सरकार जिम्मेदार है और अब दोषारोपण कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा इन मुद्दों को जनहित में लगातार उठाती रहेगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow