एम्स में कैंसर पीड़ितों के लिए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को जल्द ही अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक सेट की मिलने वाली सौगात  

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे एम्स बिलासपुर में कैंसर पीड़ितों के लिए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को जल्द ही अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक सेट की सौगात मिलने वा

Mar 28, 2026 - 12:57
Mar 28, 2026 - 13:34
 0  1
एम्स में कैंसर पीड़ितों के लिए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को जल्द ही अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक सेट की मिलने वाली सौगात  
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

यंगवार्ता न्यूज़ - बिलासपुर    28-03-2026

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे एम्स बिलासपुर में कैंसर पीड़ितों के लिए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को जल्द ही अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक सेट की सौगात मिलने वाली है। इन हाईटेक उपकरणों के आने के बाद अब शरीर के भीतर छिपे जटिल ट्यूमर और कैंसर की गांठों को निकालने के लिए बड़े चीरे लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

दूरबीन विधि से होने वाले इन ऑपरेशनों से न केवल मरीजों का दर्द कम होगा, बल्कि संक्रमण का खतरा भी न के बराबर रह जाएगा। कैंसर की सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती स्वस्थ कोशिकाओं को बचाते हुए केवल ट्यूमर को पूरी तरह बाहर निकालना होता है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों के साथ कई बार जटिल सर्जरी में बड़े कट लगाने पड़ते हैं, इससे मरीज को ठीक होने में हफ्तों लग जाते हैं।

अब एम्स में आने वाले नए लैप्रोस्कोपिक सेट में हाई-स्पीड ड्रिल सिस्टम और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट जैसे फीचर्स होंगे। यह तकनीक सर्जन को शरीर के भीतर एचडी क्वालिटी में देखने और माइक्रो-लेवल पर सटीक कटिंग करने की सुविधा प्रदान करेगी। इसमें शामिल वेसल सीलर तकनीक सर्जरी के दौरान नसों को तुरंत सील कर देती है, जिससे खून बहुत कम बहता है और मरीज को अतिरिक्त खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। 

बड़ा घाव न होने के कारण मरीज को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है। जो मरीज पहले 15 दिन में ठीक होते थे, वे अब 4-5 दिनों में घर जा सकेंगे। ऑपरेशन थिएटर में शरीर का कम हिस्सा खुला रहने से बाहरी बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा न्यूनतम हो जाता है। 

ऑन्कोलॉजी के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए ये उपकरण कैंसर की स्टेज और फैलाव को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ जाती है। बाहरी राज्यों के बड़े निजी अस्पतालों में इस स्तर की सर्जरी का खर्च लाखों में होता है, जो अब एम्स में रियायती दरों पर संभव होगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow