यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 21-03-2026
राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि ₹54,928 करोड़ का बजट पिछले वर्ष के ₹58,514 करोड़ से कम है, जो स्पष्ट रूप से बताता है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी वित्तीय विफलता स्वीकार करते हुए कर्मचारियों का वेतन तक स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार वेतन रोक रही है , दूसरी तरफ अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए छोटे-छोटे मानदेय बढ़ाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। यह बजट विकास का नहीं, वित्तीय दिवालियापन का दस्तावेज है।
राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सरकार ने फिर 100% गारंटी पूरी करने का दावा किया है, जबकि 3 साल में एक भी प्रमुख गारंटी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन का 3% से लेकर 50% तक स्थगन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की आर्थिक हालत बेहद खराब हो चुकी है। जब सरकार खुद वेतन नहीं दे पा रही, तो विकास क्या करेगी? लोक सभा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि सरकार ने दूध और फसलों के एमएसपी बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन किसानों को वास्तविक भुगतान और मार्केट सपोर्ट नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि एक लाख गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा भी सिर्फ चुनावी स्टंट है। घोषणाओं की खेती , लेकिन किसानों के खेत सूखे पड़े हैं।
लोक सभा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है और अब वेतन स्थगन जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजट में कोई ठोस आर्थिक रोडमैप नहीं है और केवल घोषणाओं के जरिए जनता को गुमराह किया जा रहा है। लोक सभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन के नाम पर वेतन रोक दिया, लेकिन खर्च की प्राथमिकताओं पर कोई स्पष्टता नहीं है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन रोकना सरकार की असफल आर्थिक नीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। लोक सभा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि सरकार महिलाओं को ₹1500 देने की बात कर रही है, लेकिन तीन साल में एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने की बजाय सरकार उन्हें केवल ट्रेनिंग और भत्ते के नाम पर बहला रही है। यह बजट उम्मीद नहीं , निराशा और धोखे का प्रतीक है।