HPU में 186 नियुक्तियों पर CAG की आपत्तियों के बावजूद कार्रवाई नहीं; फीस वृद्धि और नए टाइम टेबल का SFI ने किया विरोध

यंगवार्ता न्यूज - शिमला 13 अगस्त 2026 :   हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में गैर-प्रोफेसर/शिक्षक नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, लगातार फीस वृद्धि, हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी तथा नए क्लास टाइम टेबल के मुद्दे को लेकर आज स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठक कर अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार, फाइनेंस ऑफिसर तथा प्लानिंग एंड डेवलपमेंट से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। SFI ने बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का सवाल उठाया। SFI का कहना है कि संगठन ने RTI के माध्यम से लगभग 13,000 पन्नों के दस्तावेज जुटाकर इन नियुक्तियों में अनियमितताओं को उजागर किया था। इसके बाद हाल ही में CAG की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की 186 नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं। SFI लंबे समय से इन नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। SFI ने स्पष्ट मांग रखी कि जब तक नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक छात्रों पर नया फीस स्ट्रक्चर लागू नहीं किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय को शिक्षा का केंद्र बनाया जाना चाहिए, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों के लिए डिग्री हासिल करने का संस्थान। बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा लागू किए गए नए क्लास टाइम टेबल का भी विरोध किया गया। नए टाइम टेबल में कक्षाओं को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सीमित किया गया है। SFI ने कहा कि छात्रों को पूरे दिन कक्षाओं में बांधकर रखना किसी समस्या का समाधान नहीं है। विश्वविद्यालय को छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं, विभागीय परिस्थितियों और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए टाइम टेबल पर पुनर्विचार करना चाहिए। इसके साथ ही SFI ने बॉयज़ हॉस्टल की फीस में लगभग 80 प्रतिशत बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब छात्रों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, तो उन पर इतनी बड़ी फीस वृद्धि का बोझ डालना पूरी तरह अनुचित है। SFI ने मांग की कि छात्रों से बढ़ी हुई हॉस्टल फीस वसूलने का निर्णय वापस लिया जाए। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि फीस से संबंधित मुद्दे पर आगामी फाइनेंस कमेटी की बैठक में चर्चा की जाएगी। SFI ने इस जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को केवल समितियों और बैठकों के नाम पर टाला जाता रहा तो इसका सीधा नुकसान छात्रों को होगा। SFI कैंपस सचिव मुकेश राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों का बोझ छात्रों पर डालने के बजाय प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं और खर्चों की समीक्षा करनी चाहिए। SFI कैंपस सचिव मुकेश राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की मांगों पर चार दिनों के भीतर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना होगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि चार दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो 17 अगस्त को विश्वविद्यालय के सभी प्रवेश द्वार बंद कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा और कुलपति के विश्वविद्यालय पहुंचने का विरोध किया जाएगा। SFI ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक, शैक्षणिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, SFI अपना संघर्ष जारी रखेगी। SFI की प्रमुख मांगें: 186 नियुक्तियों में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराई जाए। नियुक्तियों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। जांच और कार्रवाई होने तक नया फीस स्ट्रक्चर छात्रों पर लागू न किया जाए। 10 बजे से 5 बजे तक के नए क्लास टाइम टेबल पर पुनर्विचार किया जाए। बॉयज़ हॉस्टल की लगभग 80 प्रतिशत फीस वृद्धि वापस ली जाए। छात्रों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ डालने की नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए। SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन मांगों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो 17 अगस्त से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

Aug 13, 2026 - 17:27
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HPU में 186 नियुक्तियों पर CAG की आपत्तियों के बावजूद कार्रवाई नहीं; फीस वृद्धि और नए टाइम टेबल का SFI ने किया विरोध
यंगवार्ता न्यूज - शिमला 13 अगस्त 2026 : 
 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में गैर-प्रोफेसर/शिक्षक नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, लगातार फीस वृद्धि, हॉस्टल फीस में बढ़ोतरी तथा नए क्लास टाइम टेबल के मुद्दे को लेकर आज स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बैठक कर अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार, फाइनेंस ऑफिसर तथा प्लानिंग एंड डेवलपमेंट से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।

SFI ने बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का सवाल उठाया। SFI का कहना है कि संगठन ने RTI के माध्यम से लगभग 13,000 पन्नों के दस्तावेज जुटाकर इन नियुक्तियों में अनियमितताओं को उजागर किया था। इसके बाद हाल ही में CAG की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की 186 नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं। SFI लंबे समय से इन नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

SFI ने स्पष्ट मांग रखी कि जब तक नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक छात्रों पर नया फीस स्ट्रक्चर लागू नहीं किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय को शिक्षा का केंद्र बनाया जाना चाहिए, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों के लिए डिग्री हासिल करने का संस्थान।

बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा लागू किए गए नए क्लास टाइम टेबल का भी विरोध किया गया। नए टाइम टेबल में कक्षाओं को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सीमित किया गया है। SFI ने कहा कि छात्रों को पूरे दिन कक्षाओं में बांधकर रखना किसी समस्या का समाधान नहीं है। विश्वविद्यालय को छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं, विभागीय परिस्थितियों और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए टाइम टेबल पर पुनर्विचार करना चाहिए।

इसके साथ ही SFI ने बॉयज़ हॉस्टल की फीस में लगभग 80 प्रतिशत बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब छात्रों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, तो उन पर इतनी बड़ी फीस वृद्धि का बोझ डालना पूरी तरह अनुचित है। SFI ने मांग की कि छात्रों से बढ़ी हुई हॉस्टल फीस वसूलने का निर्णय वापस लिया जाए।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि फीस से संबंधित मुद्दे पर आगामी फाइनेंस कमेटी की बैठक में चर्चा की जाएगी। SFI ने इस जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को केवल समितियों और बैठकों के नाम पर टाला जाता रहा तो इसका सीधा नुकसान छात्रों को होगा। SFI कैंपस सचिव मुकेश राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों का बोझ छात्रों पर डालने के बजाय प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं और खर्चों की समीक्षा करनी चाहिए।

SFI कैंपस सचिव मुकेश राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की मांगों पर चार दिनों के भीतर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना होगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि चार दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो 17 अगस्त को विश्वविद्यालय के सभी प्रवेश द्वार बंद कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा और कुलपति के विश्वविद्यालय पहुंचने का विरोध किया जाएगा।

SFI ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक, शैक्षणिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, SFI अपना संघर्ष जारी रखेगी।

SFI की प्रमुख मांगें:

186 नियुक्तियों में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराई जाए।

नियुक्तियों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

जांच और कार्रवाई होने तक नया फीस स्ट्रक्चर छात्रों पर लागू न किया जाए।

10 बजे से 5 बजे तक के नए क्लास टाइम टेबल पर पुनर्विचार किया जाए।

बॉयज़ हॉस्टल की लगभग 80 प्रतिशत फीस वृद्धि वापस ली जाए।

छात्रों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ डालने की नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए।

SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन मांगों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो 17 अगस्त से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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