प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र, राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू) में द्वितीय जिला स्तरीय सेंसिटाइजेशन कार्यशाला आयोजित

प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र, राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू), जिला शिमला में RAMP योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश उद्यमिता विकास केंद्र (HPCED), उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से तथा द प्लैनेट एजुकेशन सोसाइटी, पांवटा साहिब द्वारा द्वितीय जिला स्तरीय सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया।

Sep 19, 2026 - 17:05
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प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र, राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू) में द्वितीय जिला स्तरीय सेंसिटाइजेशन कार्यशाला आयोजित

यंगवार्ता -न्यूज  - शिमला 19 सितंबर 2026 : 

प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र, राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू), जिला शिमला में RAMP योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश उद्यमिता विकास केंद्र (HPCED), उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से तथा द प्लैनेट एजुकेशन सोसाइटी, पांवटा साहिब द्वारा द्वितीय जिला स्तरीय सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं एवं विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्वरोजगार, स्टार्टअप, नवाचार तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों में उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्थानीय संसाधनों, कौशल एवं नवीन विचारों के आधार पर अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम में डॉ. उमेश नारटा, प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी, RVS राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू), डॉ. रवि प्रकाश, प्रो. प्रमिला कैथ, प्रो. दिव्यांशी शर्मा एवं Er. दीपक नेगी सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। द प्लैनेट एजुकेशन सोसाइटी की ओर से श्री हर्ष कुमार, सहायक प्रबंधक तथा श्री माम राज, सेक्रेटरी सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यशाला में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें बड़ी संख्या में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, उद्यमी मानसिकता, बिजनेस आइडिया की पहचान, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध व्यवसायिक अवसरों, सरकारी योजनाओं एवं संस्थागत सहयोग के बारे में जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और नवाचार के साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में नए एवं टिकाऊ व्यवसाय विकसित किए जा सकते हैं।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक चर्चा भी की गई, जिसमें उन्होंने व्यवसाय शुरू करने, बाजार की समझ, वित्तीय प्रबंधन, स्वरोजगार तथा सरकारी सहायता से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें अपने विचारों को व्यावहारिक बिजनेस मॉडल में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

यह पहल ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता की सोच विकसित करने तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं रोजगार सृजन के नए अवसर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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