राज्यपाल से मिला भाजपा प्रतिनिधिमंडल, डॉ. राजीव बिंदल और जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन

भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की अध्यक्षता में लोक भवन में माननीय राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मिला। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश से जुड़े विभिन्न जनहित एवं प्रशासनिक विषयों को राज्यपाल के समक्ष रखा

May 25, 2026 - 15:42
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राज्यपाल से मिला भाजपा प्रतिनिधिमंडल, डॉ. राजीव बिंदल और जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
 
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  25-05-2026
भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की अध्यक्षता में लोक भवन में माननीय राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मिला। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश से जुड़े विभिन्न जनहित एवं प्रशासनिक विषयों को राज्यपाल के समक्ष रखा। इस अवसर पर पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, संजय सूद, प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, जिलाध्यक्ष केशव चौहान, प्रदेश सचिव संजय ठाकुर एवं कुसुम सदरेट, कोषाध्यक्ष कमलजीत सूद, कार्यालय सचिव प्रमोद ठाकुर, वरिष्ठ प्रवक्ता गणेश दत्त, मीडिया विभाग के प्रदेश संयोजक कर्ण नंदा, किसान मोर्चा अध्यक्ष संजीव देष्टा, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष गुरमीत सिंह, जगदीश चंद शर्मा, अंशुल बंसल, किरण बाबा, प्यार सिंह, सुदीप महाजन एवं रूपा शर्मा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। 
हिमाचल प्रदेश में जारी नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनावों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर बड़ा राजनीतिक एवं संवैधानिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने, जनादेश को कमजोर करने तथा प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने में लगी हुई है। भाजपा ने इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं बल्कि लोकतंत्र, संविधान और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में जिला परिषद , बीडीसी , पंचायती राज संस्थाओं तथा नगर निकायों से संबंधित चुनावी प्रक्रिया जारी है और पूरे प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद सरकार ऐसे फैसले ले रही है जिनसे चुनावी वातावरण प्रभावित हो सकता है। 
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-U एवं 243-ZA का उल्लेख करते हुए भाजपा ने कहा कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के समयबद्ध गठन और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करना संवैधानिक दायित्व है। पार्टी ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर “Dinesh Sharma & Another Versus State of H.P. & Others” मामले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय में भी चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप और देरी को गंभीर विषय माना गया है। ज्ञापन में कहा गया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय पर अधिकार न देना तथा अधिसूचनाओं में देरी करना संविधान के भाग IX-A की भावना के विपरीत है। भाजपा ने दावा किया कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने स्थानीय निकाय चुनाव समयबद्ध तरीके से कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश सरकार चुनावी प्रक्रिया को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर प्रशासनिक एवं राजनीतिक दबाव बनाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। 
भाजपा के अनुसार जनप्रतिनिधियों को प्रभावित कर चुनाव परिणामों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र 22 मई 2026 को आयोजित मंत्रिमंडल बैठक को माना जा रहा है। भाजपा ने राज्यपाल को दिए ज्ञापन में कहा कि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक आयोजित कर कई ऐसे फैसले लिए जिनका सीधा प्रभाव मतदाताओं, कर्मचारियों, महिलाओं, युवाओं और विभिन्न वर्गों पर पड़ता है। भाजपा का आरोप है कि इन घोषणाओं और निर्णयों का उद्देश्य चुनावी लाभ प्राप्त करना तथा मतदाताओं को प्रभावित करना था। भाजपा ने ज्ञापन में कैबिनेट बैठक के दौरान लिए गए फैसलों का विस्तृत उल्लेख भी किया है। इनमें इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना में बदलाव, ₹1500 प्रतिमाह सहायता केवल ₹2 लाख से कम आय वाली महिलाओं को देने का निर्णय, विभिन्न विभागों में 2215 पदों को भरने की मंजूरी, सरकारी सीबीएसई स्कूलों में 1500 शिक्षकों की भर्ती, पर्यटन सीजन में 24 घंटे दुकानें खुली रखने का निर्णय, कॉलेज प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 63 वर्ष करना, मिड-डे मील और मल्टी टास्क वर्करों के मानदेय में वृद्धि, सिलाई अध्यापिकाओं के मानदेय में ₹1000 की बढ़ोतरी तथा लोक निर्माण विभाग के मल्टी टास्क वर्करों का वेतन बढ़ाना शामिल है। 
इसके अलावा भाजपा ने हिम-चंडीगढ़ परियोजना के लिए 8000 बीघा भूमि उपलब्ध करवाने , शिक्षा बोर्ड के 300 स्कूलों में CBSE जैसी सुविधाएं लागू करने, फिशिंग रॉयल्टी को 7 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने, परागपुर में नए SDM कार्यालय की मंजूरी और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठन जैसे फैसलों को भी चुनावी माहौल से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि उप मंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा तथा नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की संभावनाओं से जुड़े निर्णय चुनावों के दौरान लेना बेहद संवेदनशील विषय है और इससे राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है। भाजपा ने राज्यपाल के समक्ष आठ प्रमुख मांगें भी रखी हैं। इनमें चुनाव आचार संहिता के दौरान आयोजित मंत्रिमंडल बैठक और उसमें लिए गए निर्णयों की संवैधानिक एवं प्रशासनिक समीक्षा, चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे निर्णयों और घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रोक, चुनावों के दौरान नियमों एवं अधिसूचनाओं में बदलाव की न्यायिक जांच, सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने के मामलों की स्वतंत्र जांच शामिल हैं। 
इसके अतिरिक्त भाजपा ने उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने, नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराने तथा चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई घोषणाओं और निर्णयों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की भी मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे के माध्यम से प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादाओं को बड़ा राजनीतिक विमर्श बनाने की कोशिश कर रही है। यदि आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव या प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवाद और बढ़ता है, तो यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है।

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