सरकारी डिपो में मिलने वाले मुफ्त राश्न की उच्च स्तरीय जांच करवाने की लोगों ने की मांग
केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी डिपो के माध्यम से गरीब परिवारों को दिए जाने वाले मुफ्त राशन बारे लोगों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है और अपात्र परिवार को इस योजना से बाहर किया जाना चाहिए ।
जुन्गा क्षेत्र के सेवक राम ठाकुर, वेदप्रकाश शर्मा, जिया लाल, नेक राम, अजय कुमार , रमेश चंद्र शर्मा सहित अनेक लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा गरीब परिवार को दिए जाने वाले मुफ्त राशन को सबसे ज्यादा साधन संपन लोग डकार रहे हैं जबकि अनेक पात्र परिवार इस सुविधा से वंचित हैं । इनका कहना है कि अधिंकाश परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में वाहन, पक्के मकान व सभी आधुनिक सुविधाएं हैं फिर भी सरकारी डिपो से पीएचएच योजना के तहत मुफ्त राशन ले रहे हैं । इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक संयुक्त परिवार में अलग अलग नाम से राशनकार्ड बनाए गए हैं जिन्हें पंचायत प्रधानों ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर बीपीएल और पीएच श्रेणी में डाला गया है । जिसका विशेषतौर पर मध्यम वर्ग के परिवारों को बहुत मलाल है ।
सहकारी सभा के संचालक उधम सिंह ठाकुर ने बताया कि कम दाम और मुफ्त में मिलने वाला राशन केवल तीन श्रेणी के परिवारों को मिलता है । जिनमें अंतोदय अर्थात सबसे गरीब श्रेणी , बीपीएल और पीएच (प्रायोरिटी हॉउस ) श्रेणी शामिल है । डिपो संचालक के अनुसार बीपीएल के छः सदस्य वाले राश्नकार्ड को 12 किलोग्राम मुफ्त चावल और 17 किलोग्राम आटा एक रूपये 20 पैसे के हिसाब से मिलता है अर्थात 20 रूपये .40 पैसे में 29 किलोग्राम राश्न मिल रहा है । इसी प्रकार पीएच के तहत चार सदस्य के राश्नकार्ड पर 08 किलोग्राम मुफ्त चावल और 11 किलो 200 ग्राम आटा 1.20 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से अर्थात 20 किलोग्राम राशन केवल 13.40 रूपये मिल रहा है ।
खाद्य एवं आपूर्ति कार्यालय शिमला में जब इस बारे बात की गई तो उन्होने बताया कि बीपीएल और पीएच तथा अंतोदय परिवार की लिस्टें पंचायत स्तर पर बनती है जिसके आधार पर राश्न का आबंटन किया जाता है । इसी प्रकार जब इस बारे जुन्गा तहसील के अनेक पंचायत सचिवों से बात की गई । इन्होने भी माना कि वर्तमान में काफी साधन संपन परिवार मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे हैं जिसकी समीक्षा किए जाना आवश्यक है
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