हिम केयर योजना को बदनाम करने से बाज़ आएं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को चेताया है कि वो पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू हुई लोकप्रिय योजनाओं को बदनाम करने से बाज़ आएं और जनता को भ्रमित करना छोड़ दें। मुख्यमंत्री द्वारा चंबा जिले के भरमौर में जनसभा के दौरान हिम केयर स्वास्थ्य योजना को लेकर दी गई टिप्पणी पर कड़ा एतराज़ जताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है लेकिन मुख्यमंत्री अभी भी झूठ का सहारा लेकर पूर्व भाजपा सरकार को कोसने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनकी सरकार की विदाई का समय नजदीक आया तो अब दुर्गम इलाकों की याद आ रही है। इन चार वर्षों में इनके दर्शन तो हुए नहीं और अब जनता को भ्रमित करने के लिए हमारे समय में शुरू हुई योजनाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खुद मुख्यमंत्री इन चार वर्षों में ऐसी कोई योजना शुरू ही नहीं करवा सके कि जिसे लोग याद रख सकें लेकिन हमारी सबसे लोकप्रिय योजना को बदनाम करने पर जरूर तुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समय में शुरू हुई हिम केयर स्वास्थ्य योजना हिमाचल की जनता के लिए वरदान साबित हुई है जबकि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इसको बंद करने और बजट रोकने की पुरजोर कोशिश की लेकिन भाजपा विधायक दल के विरोध के चलते वो इसको बंद नहीं करवा पाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बेतुकी और तथ्यहीन बातें करके इस योजना को बदनाम करने के बजाय उन लोगों के परिजनों से माफी मांगनी चाहिए जिन्हें सुक्खू सरकार द्वारा इस योजना का गला घोंटने के चलते अपने परिजनों को खोना पड़ा है। टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी शिमला में ऐसे कितने ही मामले सामने आए जब लोगों को इस योजना में कार्ड होने के बावजूद इस सरकार में मुफ़्त इलाज की सुविधा नहीं दी गई और कुछ लोगों को पैसों के अभाव में जीवन से हाथ धोना पड़ा।
उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि आप अगर खुद कोई अच्छा काम नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम उस योजना का गला घोंटने और बदनाम करने की कोशिश न करें जिसने पांच लाख तक मुफ़्त इलाज की सुविधा 80 लाख हिमाचलियों को दी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अब अपनी साख बचाने के लिए भागदौड़ करने लगे हैं जब जमीन उनके पैरों तले खिसक चुकी है। पहले लोकसभा चुनाव में चारों सीटें हारी और फिर अभी पंचायतीराज एवं स्थानीय निकाय चुनाव में करारी हार के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा है। कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली तलब किया तो अपनी हार का ठीकरा मंत्रियों पर फोड़ दिया जबकि बाद में मंत्री दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने मुख्यमंत्री को ही इसका जिम्मेवार बताया। यहां तक कि मुख्यमंत्री को बदलने तक की आवाज़ कांग्रेस के अंदर और मंत्री मंडल के सहयोगियों ने उठाई है। मुख्यमंत्री जहां भी देखो भाजपा के गुट गिनाने में व्यस्त रहते हैं जबकि भाजपा एकजुट होकर चुनाव जीत रही है।
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