उन्नत कृषि एवं पशुपालन विधियों को अपनाने से मिलेगा अधिक लाभ , कृषि विश्वविद्यालय ने जारी की कृषि एवं पशुपालन कार्यों की मार्गदर्शिका

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं पर्दा वैज्ञानिक डॉ पंकज मित्तल ने बताया की चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय , पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने दिसम्बर , 2024 महीने के दूसरे पखवाड़े में किए जाने वाले कृषि एवं पशुपालन कार्यों के बारे में मार्गदर्शिका जारी की है जिसे अपनाकर जिला सिरमौर के किसान भी लाभ उठा सकते हैं

Dec 15, 2024 - 17:53
Dec 15, 2024 - 18:12
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उन्नत कृषि एवं पशुपालन विधियों को अपनाने से मिलेगा अधिक लाभ , कृषि विश्वविद्यालय ने जारी की कृषि एवं पशुपालन कार्यों की मार्गदर्शिका
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  15-12-2024
कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं पर्दा वैज्ञानिक डॉ पंकज मित्तल ने बताया की चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय , पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने दिसम्बर , 2024 महीने के दूसरे पखवाड़े में किए जाने वाले कृषि एवं पशुपालन कार्यों के बारे में मार्गदर्शिका जारी की है जिसे अपनाकर जिला सिरमौर के किसान भी लाभ उठा सकते हैं। प्रदेश के निचले क्षेत्रों में जहां पर गेहूं की बुआई नवम्बर माह में की गई हो और खरपतवारों में 2-3 पत्तियां आ गई हो , तो खरपतवार नियंत्रण के लिए वेस्टा (मेटसल्फयूरोन मिथाईल 20 डब्ल्यू पी + क्लोडिनाफॉप प्रोपार्गिल 15 डब्ल्यूपी ) 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी या क्लोडिनाफॉप की 24 ग्रा. (10 डब्ल्यू.पी.) या 16 ग्राम. (15 डब्ल्यू. पी.) व 2,4-डी की 50 ग्रा. मात्रा 30 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। 2,4-डी. का छिड़काव क्लोडिनाफॅाप के छिड़काव के 2-3 दिन के बाद करें। 
यदि गेहूँ के साथ चौड़ी पत्ती वाली फसल की खेती की गयी हो तो 2,4-डी रसायन का प्रयोग न करें। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में अगर खरपतवार नियन्त्रण के लिए रसायन का प्रयोग न किया गया हो तो यह समय इन फसलों में निराई-गुड़ाई करने का है। प्रदेश की निचले एवं मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में प्याज की तैयार पौध की रोपाई 15-20 सेंटीमीटर पंक्तियों में तथा 5-7 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी पर करें। रोपाई के उपरान्त खेतों में हल्की सिंचाई करें। मध्यवर्ती क्षेत्रों में आलू की बुआई के लिए उन्नत किस्मों जैसे कुफरी ज्योति , कुफरी गिरिराज , कुफरी चन्द्रमुखी इत्यादि का चयन करें। बुआई के लिए स्वस्थ , रोग रहित , साबुत या कटे हुए कन्द , वजन लगभग 30 ग्राम , जिनमें कम से कम 2-3 आंखें हों, का प्रयोग करें। बुआई से पहले कन्दों को डाइथेन एम-45 (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) के घोल में 20 मिनट तक उपचारित करें। 
कंद को छाया में सुखाने के बाद अच्छी तरह से तैयार खेत में 45-60 सेंटीमीटर पंक्तियों की दूरी एवं 15-20 सेंटीमीटर के अंतर पर बुआई करें। आलू में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राटाफ 60 ग्राम या एरेलान /ग्रामिलोन 70 ग्राम या गोल 40 मिली लीटर को 30 लीटर पानी में मिलाकर  छिड़काव किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त खेतों में लगी हुई सभी प्रकार की सब्ज़ियों जैसे फूलगोभी, बन्दगोभी, गांठगोभी, ब्रोकली, चाईनीज बन्दगोभी, पालक, मेथी, मटर व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें। सरसों वर्गीय तिलहनी फसलों अथवा गोभी वर्गीय सब्ज़ियों में तेले या एफिड के नियन्त्रण के लिए मैलाथियान 50 ई. सी. 30 मि.ली./30 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। प्रदेश के क्षेत्रों में किसान चने की फसल में फली छेदक सुंडी के प्रकोप के प्रति सावधान रहें तथा हरे रंग की सुंडियां फसल पर प्रकट होते ही साइपरमिथरिन 1मि.ली./लीटर पानी का छिड़काव करें तथा चने की सुण्डी के लिए फेरोमोन ट्रैप के 25 ट्रैप /हैक्टयर लगाएं। 
गोभी वर्गीय सब्जी फसल में एफिड एवं कैटरपिलर के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. की 30 मिली लीटर रसायन को 30 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। दिसम्बर महीने में तापमान में गिरावट होने के कारण पशुओं में कई प्रकार की बीमारियां सामने आती है जिनमे से कुछ अति संक्रामक रोग पशुओं के लिए घातक साबित होते हैं। उन्ही में से कुछ बीमारियां विषाणु के कारण होती है जो की जानवरों की बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बनती है। पशुपालक जानवरों में बीमारी के किसी भी लक्षण जैसे भूख न लगना या कम होना, तेज बुखार, चमड़ी पर लाल धब्बे या फोफोले निकलना तथा आँख-नाक-मुंह से अत्यधिक स्राव की स्थिति में, तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह ले। पशु चिकित्सक की सलाह से पशुओं को पेट व जिगर के कीडे मारने की दवाई दें। हरे चारे की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए, सरसों मिश्रित बीजी गई जई की कटाई ले सकते हैं। यदि पशुओं को केवल सूखा चारा ही खिला रहे हों तो प्रत्येक पशु को प्रतिदिन 40 ग्राम की दर से खनिज लवण मिश्रण अवश्य खिलाऐं। 
पशुओं को दिन में धूप में और रात को अन्दर बाधें और सर्दी से बचाव का हर संभव उपाय करें। दूध निकालने के बाद थनों पर वैसलीन या मक्खन लगा दें। गर्भधारण सुनिश्चित करने के लिए पशुओं का निरीक्षण 2-3 महीने के अन्दर करवा लें। भैसों में गर्माने के लक्षण मंद होते है अतः सुबह शाम भैसों में इनका विशेष ध्यान रखें। नये खरीदे हुए चूज़ों को बड़ी मुर्गियों के आवास से दूर पालें। आवास में रोशनी कम से कम 16 घंटे रहनी चाहिए। किसान भाईयों एवं पशु पालकों से अनुरोध है कि अपने क्षेत्रों की भौगोलिक तथा पर्यावरण परिस्थितियों के अनुसार अधिक एवं उपयोगी जानकारी हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र, सिरमौर से सम्पर्क करें। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि तकनीकी सूचना केन्द्र  01894-230395/1800-180-1551 से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

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