प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर अपनाया कड़ा रुख
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर कड़ा रुख अपनाया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 25-02-2026
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को आदेश दिए हैं कि वह वर्ष 2017 से अब तक दिए गए ऐसे सभी सेवा विस्तार मामलों का पूरा ब्योरा हलफनामे के माध्यम से अदालत में पेश करें।
यह मामला 19 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट की ओर से जनहित में दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के उल्लंघन से जुड़ा है। उस समय अदालत ने आदेश दिया था कि किसी कर्मचारी को उसकी सेवानिवृत्ति की आयु के बाद तब तक सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा, जब तक कि वह हैंडबुक ऑन पर्सनल मैटर्स के अध्याय-22 और फंडामेंटल रूल्स 56 (डी) के विशेष प्रावधानों के तहत न आता हो।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार की ओर से कई सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध जाकर सेवा विस्तार दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष कई ऐसे अदालती आदेश पेश किए, जो कोर्ट के पुराने निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार को 19 दिसंबर 2017 से लेकर अब तक दिए गए सभी सेवा विस्तारों की सूची कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को होगी।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सेवा विस्तार केवल उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए, जिनके पास अपने क्षेत्र का उत्कृष्ट ज्ञान हो। व्यक्ति में अतिरिक्त क्षमता, बौद्धिक और वैज्ञानिक योग्यता होनी चाहिए। दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में ही सरकार कर्मचारियों को सेवा विस्तार दे सकती है। लेकिन,
प्रदेश में सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, उन सभी कर्मचारियों को सेवा विस्तार दे रही है, जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह कार्मिक विभाग की नियमावली और समय-समय पर माननीय न्यायालयों की ओर से पारित आदेशों का उल्लंघन है।
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