मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना बनी निराश्रित बच्चों का सहारा, शिमला में 257 बच्चों को मिल रही सामाजिक सुरक्षा

माता-पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। ऐसी परिस्थितियों में जब अपने घर की छत भी न हो, तो जीवन का संघर्ष और भी कठिन हो जाता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना निराश्रित बच्चों एवं जरूरतमंद युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। योजना के माध्यम से जहां उन्हें आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, वहीं आवास, शिक्षा, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध करवाकर उनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नींव भी रखी जा रही है

Oct 11, 2026 - 15:13
Oct 11, 2026 - 15:43
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मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना बनी निराश्रित बच्चों का सहारा, शिमला में 257 बच्चों को मिल रही सामाजिक सुरक्षा

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  11-10-2026

माता-पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। ऐसी परिस्थितियों में जब अपने घर की छत भी न हो, तो जीवन का संघर्ष और भी कठिन हो जाता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना निराश्रित बच्चों एवं जरूरतमंद युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। योजना के माध्यम से जहां उन्हें आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, वहीं आवास, शिक्षा, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध करवाकर उनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नींव भी रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की यह पहल निराश्रित बच्चों को केवल आर्थिक सहयोग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, अपने सपनों को साकार करने और समाज में सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही है। 
जिला शिमला में योजना के सकारात्मक परिणाम अंकित कुमार और अभिषेक कुमार जैसे युवाओं की प्रेरणादायक कहानियों में स्पष्ट दिखाई देते हैं। जिला शिमला की ठियोग तहसील के ग्राम बशनोग, डाकघर सरीवन निवासी अंकित कुमार, पुत्र स्वर्गीय राजू, का जीवन माता-पिता के निधन के बाद कठिनाइयों से भर गया था। माता-पिता का साथ छूटने के बाद उनकी नानी ने उनका पालन-पोषण किया और हर संभव तरीके से उन्हें सहारा दिया। हालांकि, परिवार के पास अपना मकान नहीं होने के कारण सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी। ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके लिए संबल बनकर सामने आई। योजना के तहत अंकित ने आवास निर्माण के लिए आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें मकान बनाने के लिए 03 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने घर का सपना पूरा करने और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी। 
अंकित को योजना के अंतर्गत विवाह के लिए भी 02 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। इससे उन्हें जीवन की नई शुरुआत करने में सहयोग प्राप्त हुआ है। आवास निर्माण और विवाह अनुदान के माध्यम से मिली सहायता ने उनके जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास की नई उम्मीद जगाई है। रामपुर तहसील के गांव रुनपू, डाकघर किन्नू निवासी 24 वर्षीय अभिषेक कुमार की कहानी भी संघर्ष, संकल्प और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है। जब वह मात्र 10 वर्ष के थे, तभी उनके पिता स्वर्गीय प्यारे लाल का अचानक निधन हो गया। इसके लगभग दो वर्ष बाद बीमारी के कारण उनकी माता का भी निधन हो गया। कम उम्र में माता-पिता दोनों को खोने के बाद अभिषेक की देखभाल उनके चाचा ने की। बाद में उन्हें बाल आश्रम भेज दिया गया, जहां रहते हुए उन्होंने दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के बाद अभिषेक ने अपने पैरों पर खड़े होने के लिए इलेक्ट्रीशियन का काम सीखना शुरू किया। 
उनकी बड़ी बहन ने उन्हें यह हुनर सीखने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनमें आत्मनिर्भर बनने का विश्वास पैदा हुआ। समय के साथ वह अपने गांव लौट आए। इसी दौरान गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की जानकारी मिली और आवास सहायता के लिए आवेदन करने में सहयोग प्राप्त हुआ। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभिषेक को आवास निर्माण के लिए 03 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली। उनके माता-पिता का पुराना मकान समय के साथ जर्जर हो चुका था। अब इस सहायता से उन्होंने उसी स्थान पर नए घर का निर्माण शुरू कर दिया है। वर्षों से अपने घर का सपना संजोए अभिषेक के लिए यह सहायता एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। अभिषेक मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू और हिमाचल प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं, “कल तक मेरे पास अपना घर नहीं था, आज उसी सपने की नींव रखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ने मुझे सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि अपने भविष्य को संवारने का विश्वास भी दिया है। 
जिला कार्यक्रम अधिकारी समेकित बाल विकास सेवा ममता पॉल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत जिला शिमला में विभिन्न समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) परियोजनाओं के माध्यम से 0 से 27 वर्ष आयु वर्ग के 257 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, जिला के 12 बाल-बालिका देखभाल संस्थानों में रह रहे 237 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के साथ त्योहार अनुदान, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन वस्त्र तथा पौष्टिक आहार जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। 
जिला में योजना के तहत अब तक 30 चिल्ड्रन ऑफ़ द स्टेट को आवास निर्माण, 12 को विवाह अनुदान, 19 को उच्च शिक्षा, 11 को व्यावसायिक शिक्षा, 8 को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग तथा 8 को स्टार्टअप शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। यह प्रयास बच्चों और युवाओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग देकर शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
 

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