नव वर्ष की पहली पूर्णिमा पर पांवटा साहिब गुरुद्वारा में सजा विशेष कवि दरबार, 339 वर्ष पहले शुरू हुई परंपरा आज भी कायम

गुरु की नगरी पांवटा साहिब में नववर्ष की पहली पूर्णिमा के अवसर पर विशेष कवि दरबार का आयोजन किया गया। जिसमें अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की और आज से 339 वर्ष पहले शुरू हुई कवि दरबार सजाने की परंपरा को निभाया

Jan 4, 2026 - 19:45
Jan 4, 2026 - 20:07
 0  7
नव वर्ष की पहली पूर्णिमा पर पांवटा साहिब गुरुद्वारा में सजा विशेष कवि दरबार, 339 वर्ष पहले शुरू हुई परंपरा आज भी कायम
यंगवार्ता न्यूज़ - पांवटा साहिब  04-01-2026
गुरु की नगरी पांवटा साहिब में नववर्ष की पहली पूर्णिमा के अवसर पर विशेष कवि दरबार का आयोजन किया गया। जिसमें अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की और आज से 339 वर्ष पहले शुरू हुई कवि दरबार सजाने की परंपरा को निभाया। 
मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ कवि कुलवंत सिंह चौधरी ने बताया कि 339 वर्ष पहले गुरु गोविंद सिंह महाराज जी ने पूर्णिमा के अवसर पर कवि दरबार सजाने की परंपरा शुरू की थी जिसे आज भी यहां बखूबी निभाया जा रहा है। नव वर्ष की पहली पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही विशेष कीर्तन समागम आयोजित हुए तो वहीं रात्रि के समय कवि दरबार आयोजित किया गया जिसमें सभी धर्म के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। 
उधर मीडिया से बात करते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक जगीर सिंह ने बताया कि गुरु गोबिन्द सिंह महाराज जी ने पांवटा साहिब से ही कवि दरबार सजाने की परंपरा शुरू की थी। पांवटा साहिब में एकमात्र कवि दरबार स्थान स्थापित किया गया हैं। और यहां गुरु गोबिन्द सिंह महाराज जी कवि दरबार सजाया करते थे। उन्होंने बताया कि गुरु गोबिन्द सिंह महाराज जी ने अपने जीवन का पहला जंग भी पांवटा साहिब में लड़ा और उनके बड़े पुत्र बाबा अजीत सिंह जी का भी जन्म पांवटा साहिब में हुआ है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow