पनोग में आयुष विभाग ने स्कूल में मनाया आयुर्वेद दिवस

जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के पनोग में आयुष विभाग द्वारा जिला आयुष अधिकारी डॉ. जसप्रीत कौर एवं उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार एवं शिक्षा विभाग पनोग के तत्वावधान में 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पनोग में आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) पनोग के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के प्रभारी गोपाल पोजटा रहे।

Sep 23, 2026 - 17:33
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पनोग में आयुष विभाग ने स्कूल में मनाया आयुर्वेद दिवस

यंगवार्ता न्यूज - सिरमौर 23 सितंबर : 

जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के पनोग में आयुष विभाग द्वारा जिला आयुष अधिकारी डॉ. जसप्रीत कौर एवं उपमंडलीय आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार एवं शिक्षा विभाग पनोग के तत्वावधान में 11वां राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पनोग में आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) पनोग के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के प्रभारी गोपाल पोजटा रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गोपाल पोजटा द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान धन्वंतरि की आराधना के साथ किया गया। इसके पश्चात बच्चों द्वारा ॐ का उच्चारण किया गया। मुख्य अतिथि गोपाल पोजटा ने बच्चों को आयुर्वेद दिवस की महत्ता एवं इसके इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आयुर्वेद न केवल भारत की बल्कि विश्व की प्राचीन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परंपराओं में से एक है, जिसमें स्वस्थ जीवन के लिए आहार, औषधि, जीवनशैली, योग एवं प्राकृतिक नियमों के पालन पर विशेष बल दिया जाता है।

तत्पश्चात आयुष्मान आरोग्य मंदिर पनोग के आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारी राजेश ठाकुर ने बच्चों एवं शिक्षकों को आयुर्वेद दिवस की बधाई देते हुए आयुर्वेद के विभिन्न सिद्धांतों एवं स्वस्थ जीवनशैली के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” (Ayurveda for Healthier Tomorrow) के बारे में जानकारी देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत आयुर्वेद के मूल सिद्धांत—

“स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनं च।” से की। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है।

आयुर्वेद के मूल सिद्धांत

राजेश ठाकुर ने बताया कि आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को शरीर की प्रमुख जैविक शक्तियों के रूप में समझाया गया है। इनके संतुलन के साथ-साथ अग्नि, धातु, मल, इन्द्रिय और मन की सम्यक् अवस्था स्वास्थ्य के लिए आवश्यक मानी गई है। उन्होंने बच्चों को बताया कि उचित आहार, नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली इन सभी के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दिनचर्या

उन्होंने दिनचर्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रतिदिन एक निश्चित एवं स्वस्थ दिनचर्या का पालन शरीर और मन दोनों को व्यवस्थित रखने में सहायक होता है। समय पर उठना, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित व्यायाम एवं योग, उचित समय पर संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद तथा मानसिक संयम स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

ऋतुचर्या

उन्होंने ऋतुचर्या के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मौसम और ऋतु के परिवर्तन के साथ शरीर में दोष, अग्नि एवं बल में भी परिवर्तन होता है। इसलिए आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार आहार-विहार में परिवर्तन करने की सलाह दी गई है, जिससे शरीर को बदलते मौसम के अनुरूप ढालने और रोगों से बचाव में सहायता मिलती है।

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में वर्ष को हेमन्त, शिशिर, वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा और शरद छह ऋतुओं में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ऋतु में वात, पित्त और कफ की संचय, प्रकोप एवं प्रशमन की अलग-अलग अवस्थाएं होती हैं और उसी के अनुसार आहार-विहार अपनाना ऋतुचर्या का प्रमुख उद्देश्य है।

अष्टांग योग एवं उसका महत्व

राजेश ठाकुर ने विद्यार्थियों को महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और व्यवहार को संतुलित करने की व्यापक पद्धति है। अष्टांग योग के आठ अंग हैं—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

उन्होंने बताया कि यम और नियम व्यक्ति के आचरण एवं अनुशासन का आधार हैं, आसन शरीर को स्वस्थ एवं स्थिर बनाने में सहायक हैं, जबकि प्राणायाम श्वास एवं मानसिक संतुलन पर कार्य करता है। प्रत्याहार, धारणा और ध्यान मन की एकाग्रता एवं आत्मनियंत्रण को विकसित करते हैं तथा समाधि योग की उच्च अवस्था को दर्शाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि वर्तमान समय में पढ़ाई का तनाव, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, अनियमित नींद और शारीरिक निष्क्रियता बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियमित योग एवं प्राणायाम एकाग्रता, अनुशासन, मानसिक शांति और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने में उपयोगी हो सकते हैं।

पोषण एवं संतुलित आहार

कार्यक्रम में पोषण के महत्व पर भी विशेष जानकारी दी गई। राजेश ठाकुर ने बताया कि बच्चों के शारीरिक विकास, मस्तिष्क के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पढ़ाई में एकाग्रता के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थ, दालें, अनाज, हरी सब्जियां, फल, दूध/दुग्ध पदार्थ तथा पर्याप्त पानी को आहार में उचित मात्रा में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।

नशा निवारण

उन्होंने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि तंबाकू, शराब, नशीले पदार्थों तथा अन्य व्यसनों का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा अपने साथियों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

जंक फूड के नुकसान

राजेश ठाकुर ने जंक फूड के अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अधिक तला हुआ, अत्यधिक नमक, चीनी और वसा वाला भोजन नियमित रूप से लेने से मोटापा तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने बच्चों को घर का ताजा, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन प्राथमिकता देने और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी।

मोबाइल के फायदे एवं नुकसान

उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के सही एवं संतुलित उपयोग के बारे में भी जानकारी दी। मोबाइल का उपयोग शिक्षा, ऑनलाइन अध्ययन, जानकारी प्राप्त करने, संचार तथा आवश्यक डिजिटल सेवाओं के लिए उपयोगी हो सकता है। लेकिन इसके अत्यधिक एवं अनियंत्रित उपयोग से समय की बर्बादी, शारीरिक निष्क्रियता, नींद में बाधा, आंखों पर तनाव तथा पढ़ाई में एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल का उपयोग आवश्यकता एवं निर्धारित समय के अनुसार करने की सलाह दी।

कार्यक्रम के अंत में आयुष विभाग के योग गाइड बलदेव धामटा ने NSS के विद्यार्थियों को विभिन्न योग एवं प्राणायाम क्रियाएं करवाईं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका, शीतली आदि प्राणायाम करवाए तथा पद्मासन, वज्रासन, गोमुखासन, शीर्षासन, मालासन आदि योगासनों का अभ्यास करवाया। विद्यार्थियों को योगासन एवं प्राणायाम करते समय सही विधि, श्वास-प्रश्वास तथा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार अभ्यास करने के महत्व के बारे में भी बताया गया।

कार्यक्रम के अंत में आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारी राजेश ठाकुर ने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेद एवं योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भविष्य का निर्माण केवल उपचार से नहीं, बल्कि बचपन से ही सही खान-पान, नियमित दिनचर्या, योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद, सकारात्मक सोच और नशे से दूरी जैसे स्वस्थ व्यवहार अपनाने से किया जा सकता है।

इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाएं कौशल्या पोजटा, रीना शर्मा, इंदर पोजटा, काजल पोजटा, निर्मला पोजटा, आयुष विभाग से धर्म सिंह सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं NSS के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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