पहाड़ी आंगन: स्वाद, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का संगम

भारतीय समाज में नारी को प्राचीन काल से ही विशिष्ट स्थान प्राप्त रहा है। आधुनिक दौर में भी महिलाएं विकास की मुख्यधारा में समान रूप से सहभागी बन रही हैं। वह न केवल राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं

Jul 27, 2025 - 14:27
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पहाड़ी आंगन: स्वाद, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का संगम
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    27-07-2025

भारतीय समाज में नारी को प्राचीन काल से ही विशिष्ट स्थान प्राप्त रहा है। आधुनिक दौर में भी महिलाएं विकास की मुख्यधारा में समान रूप से सहभागी बन रही हैं। वह न केवल राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं, बल्कि राजनीति, विधि, चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। हि

माचल प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके। इसी दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शिमला स्थित ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में ‘पहाड़ी आंगन प्रदर्शनी’ का आयोजन किया गया है। \

इस प्रदर्शनी में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प, हैंडीक्राफ्ट उत्पादों और हिम-ईरा ब्रांड के तहत स्थानीय वस्तुओं के स्टॉल्स स्थापित कर रही हैं। यह प्रदर्शनी न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है।

यह आयोजन हिमाचल की पारंपरिक जीवन शैली, खान-पान, परिधानों और लोक कलाओं को समर्पित है, जहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटक भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनी के पहले चरण में यह मंच शिमला जिला के स्वयं सहायता समूहों को प्रदान किया गया है। भविष्य में यह अवसर अन्य जिला की महिलाओं को भी दिया जाएगा, जिससे प्रदेश के सभी क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय उत्पादों से देश-विदेश के पर्यटक रूबरू हो सकें।

प्रदर्शनी के प्रथम चरण में शिमला जिला के स्वयं सहायता समूहों द्वारा 12 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां पारंपरिक व्यंजनों की प्रस्तुति और हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इन स्टॉल्स को लेकर स्थानीय लोग और पर्यटक अत्यधिक उत्साहित हैं।

‘पहाड़ी आंगन’ में स्थापित यह महिला केंद्रित प्रदर्शनी और विक्रय मंच न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई पहचान भी दे रहा है। यहां महिलाएं केवल उत्पाद निर्माता नहीं, बल्कि सफल व्यवसायी, निर्णयकर्ता और उद्यमिता की मिसाल बन चुकी हैं। 

इसके अतिरिक्त, प्रदेश में 3,374 ग्राम संगठन गठित किए गए हैं, जिनमें से 1,120 संगठनों को 41 करोड़ 5 लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि प्रदान की गई है। वहीं, 117 क्लस्टर स्तरीय संघों का भी गठन किया गया है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग का आधार बन रहे हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त, अभिषेक वर्मा ने बताया कि बेंटनी कैसल में आयोजित ‘पहाड़ी आंगन’ प्रदर्शनियों में शिमला जिला की महिलाओं द्वारा पारंपरिक भोजन एवं हस्तशिल्प उत्पादों की सुंदर प्रदर्शनी लगाई गई है। यह पहल केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों का उद्देश्य आपसी सहयोग के माध्यम से आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। ‘पहाड़ी आंगन’ के माध्यम से शिमला की महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में यह एक सार्थक प्रयास है।

उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, हितेंद्र शर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा शिमला स्थित ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में 'पहाड़ी आंगन' पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत शिमला जिला की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि यह एक छोटा-सा प्रयास है जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं को मंच प्रदान कर उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।

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