ऋतुराज ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, पोस्ट ऑफिस में कार्यरत माया राम को लौटाई ₹60000 की रकम

आज के दौर में जहां अक्सर पैसों के लिए रिश्ते और उसूल तक दांव पर लग जाते हैं, वहीं एक युवक ने अपनी ईमानदारी से समाज के सामने मिसाल पेश की है। सड़क किनारे मिले 60 हजार रुपये अपने पास रखने के बजाय उसने असली मालिक तक पहुंचाने का फैसला किया।  

Jun 13, 2026 - 19:59
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ऋतुराज ने पेश की ईमानदारी की मिसाल, पोस्ट ऑफिस में कार्यरत माया राम को लौटाई ₹60000 की रकम

यंगवार्ता न्यूज नाहन 13 जून, 2026 : 

आज के दौर में जहां अक्सर पैसों के लिए रिश्ते और उसूल तक दांव पर लग जाते हैं, वहीं एक युवक ने अपनी ईमानदारी से समाज के सामने मिसाल पेश की है। सड़क किनारे मिले 60 हजार रुपये अपने पास रखने के बजाय उसने असली मालिक तक पहुंचाने का फैसला किया।  


ऋतुराज वो युवक है जिन्होंने अपनी ईमानदारी से एक मिसाल कायम की है। 10 जून को पोस्ट ऑफिस के समीप उन्हें नोटों की एक गड्डी मिली। गड्डी में करीब 60 हजार रुपये की नगदी थी। इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद ऋतुराज ने उसे अपने पास रखने की बजाय उसके असली मालिक की तलाश शुरू कर दी। मीडिया से बात करते हुए ऋतुराज ने बताया कि खोजबीन के दौरान पता चला कि यह रकम पोस्ट ऑफिस में कार्यरत मायाराम की है। काफी प्रयास के बाद उन्हें मायाराम का मोबाइल नंबर मिला, जिसके बाद उन्होंने फोन कर नगदी मिलने की जानकारी दी। यह सूचना मिलते ही मायाराम के चेहरे पर राहत लौट आई, क्योंकि वह पहले ही पैसे गुम होने की शिकायत पुलिस में दर्ज करा चुके थे। आज उन्होंने गुन्नू घाट पुलिस चौकी में चौकी इंचार्ज  की मौजूदगी में मायाराम को यह रकम लौटाई। पुलिस की मौजूदगी में नगदी वापस मिलने पर मायाराम ने ऋतुराज की ईमानदारी की सराहना की और उनके साथ-साथ गनु घाट पुलिस चौकी इंचार्ज डीएसपी हेडक्वार्टर रमाकांत का भी आभार जताया।

खोई हुई धनराशि के मालिक मायाराम ने बताया कि 10 जून को वह पोस्ट ऑफिस से स्कूटी पर जा रहे थे और अचानक उनकी स्कूटी की डिग्गी से पैसे कहां गिरे उन्हें इस बारे कोई पता नहीं था निजी तौर पर उन्होंने तलाश करने की कोशिश की मगर कोई सुराग नहीं मिला। इसकी उन्होंने गुन्नू घाट चौकी में बाकायदा शिकायत दर्ज करवाई परंतु अगले दिन ही एक अज्ञात फोन के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके गुम हुए पैसे किसी व्यक्ति के पास है क्योंकि आज उसे व्यक्ति ऋतुराज ने यह पैसे उन्हें पुलिस के सामने सुपुर्द किए।

ऐसे समय में जब ईमानदारी की मिसालें कम देखने को मिलती हैं, ऋतुराज का यह कदम न केवल एक व्यक्ति की मेहनत की कमाई वापस दिलाने वाला साबित हुआ, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि सच्चाई और ईमानदारी आज भी जिंदा है।

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