प्रदेश सरकार ने आरडीजी बंद होने और केंद्रीय बजट पारित होने से पहले केंद्र सरकार ने किए दो आग्रह  

हिमाचल सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने और केंद्रीय बजट पारित होने से पहले केंद्र सरकार ने दो आग्रह किए....

Mar 4, 2026 - 15:40
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प्रदेश सरकार ने आरडीजी बंद होने और केंद्रीय बजट पारित होने से पहले केंद्र सरकार ने किए दो आग्रह  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला     04-03-2026

हिमाचल सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने और केंद्रीय बजट पारित होने से पहले केंद्र सरकार ने दो आग्रह किए हैं। पहला अनुरोध यह किया है कि केंद्र सरकार तत्काल एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर पर्वतीय राज्यों की अर्थव्यवस्था का सही आकलन करवाए, जो 16वें वित्तायोग ने नहीं किया। 

इस आकलन के अनुसार उनकी विशिष्ट जरूरतों के मुताबिक आरडीजी बहाल करें। दूसरा आग्रह यह है कि इस बीच क्योंकि हिमाचल सरकार को 2026-2027 का प्रदेश का बजट प्रस्तुत करना है, इसलिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 के राजस्व घाटे की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार अविलंब एक पैकेज राज्य को दे। 

इस राशि को अनटाइड ग्रांट के रूप में विशेष केंद्रीय सहायता के मद से जारी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात में भी यह पक्ष रखा है। इसके पीछे राज्य सरकार ने यह तर्क दिया है कि 16वें वित्त आयोग ने एक आश्चर्यजनक पद्धति अपनाई है।

15वें वित्त आयोग ने राज्यों के राजस्व व खर्चे का आकलन, राज्यवार किया और राज्यों की विशेष परिस्थिति को ध्यान में रखकर आरडीजी की संस्तुति की। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के अध्याय 9 को अगर देखें, तो इसमें सभी राज्यों को एक कसौटी पर रखकर संस्तुति की गई है। यह आकलन का स्वस्थ और पारदर्शी तरीका नहीं है। 

संविधान के अनुच्छेद 275 (1) को 280(3) (बी) में वित्त आयोग का यह दायित्व है कि वह राज्यों की आवश्यकताओं का राज्यवार स्पष्ट आकलन करे और उनके लिए उस अनुसार संस्तुति करे। जिन 17 राज्यों के लिए 15वें वित्त आयोग ने आरडीजी दी थी, उनमें कुल वार्षिक बजट का आरडीजी का दस प्रतिशत से अधिक हिस्सा मात्र तीन राज्यों में है। इनमें हिमाचल पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। 

हिमाचल प्रदेश से बजट आकार भी छोटा है। इसलिए उनके साथ हिमाचल प्रदेश की तुलना असंगत है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आरडीजी एक ऐसा माध्यम था, जिसके द्वारा टैक्स और पोस्ट डेवोल्यूश्न के बाद कुछ हद तक हम अपने बजट को संतुलित रख पाते थे और प्रदेश के विकास को जारी रख सकते थे, लेकिन आरडीजी का एकाएक बंद होना हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था सहन नहीं कर पाएगी, चाहे राज्य में किसी भी दल की सरकार हो।

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