जीओ विज़न : राजकीय महाविद्यालय सोलन में भूगोल प्रदर्शनी के जरिए दिखी सुरक्षित भविष्य की झलक

राजकीय महाविद्यालय सोलन के भूगोल विभाग द्वारा गत शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 को एक भव्य भूगोल प्रदर्शनी 'जीओ विजन , अ वे टू सस्टेनेबल एंड रेसिलियंट अर्थ' का आयोजन किया गया। 'धरा रक्षति रक्षित:' के मूल मंत्र (थीम) पर आधारित इस प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मनीषा कोहली द्वारा किया गया। इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता स्पीति घाटी के 'लंगज़ा' गांव (भारत का जीवाश्म गांव) से लाए गए 65 मिलियन वर्ष पुराने समुद्री जीवों के जीवाश्म रहे

Dec 20, 2025 - 15:48
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जीओ विज़न : राजकीय महाविद्यालय सोलन में भूगोल प्रदर्शनी के जरिए दिखी सुरक्षित भविष्य की झलक
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यंगवार्ता न्यूज़ - ​सोलन  20-12-2025
राजकीय महाविद्यालय सोलन के भूगोल विभाग द्वारा गत शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 को एक भव्य भूगोल प्रदर्शनी 'जीओ विजन , अ वे टू सस्टेनेबल एंड रेसिलियंट अर्थ' का आयोजन किया गया। 'धरा रक्षति रक्षित:' के मूल मंत्र (थीम) पर आधारित इस प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मनीषा कोहली द्वारा किया गया। इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता स्पीति घाटी के 'लंगज़ा' गांव (भारत का जीवाश्म गांव) से लाए गए 65 मिलियन वर्ष पुराने समुद्री जीवों के जीवाश्म रहे। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की समृद्ध कृषि जैव विविधता और यहाँ के विशिष्ट जीआई (GI) टैग उत्पादों के स्टालों ने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों ने हिमाचल की गौरवशाली विरासत और भूगर्भीय इतिहास को जीवंत कर दिया। 
प्रदर्शनी में भूगोल विभाग के छात्र-छात्राओं ने अपनी वैज्ञानिक सोच का परिचय देते हुए आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और भौतिक भूगोल के विभिन्न पहलुओं पर कार्यकारी (Functional) मॉडल्स प्रस्तुत किए। इन मॉडल्स के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि कैसे आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से पृथ्वी को अधिक सुरक्षित और लचीला (Resilient) बनाया जा सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा कोहली ने प्रत्येक मॉडल का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उनके व्यावहारिक ज्ञान की सराहना की। 
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारने का बेहतरीन माध्यम हैं। प्राचार्य ने इस सफल आयोजन के लिए भूगोल विभाग की प्रोफेसर निवेदिता पाठक और डॉ. नेकराम कश्यप के समर्पित प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की। प्रदर्शनी में न केवल भूगोल विभाग, बल्कि महाविद्यालय के अन्य विभागों के प्राध्यापकों , गैर-शिक्षक कर्मचारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी ने छात्रों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों को सराहा और संवाद के माध्यम से पर्यावरण और भूगोल से जुड़ी नई जानकारियां साझा कीं।

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