हिमाचल में पहली बार पहुंचा टाइगर का जोड़ा, 1800 किलोमीटर का सफर तय कर रेणुकाजी आया नर-मादा बाघ
सिरमौर के प्रसिद्ध रेणुकाजी मिनी जू में लंबे समय से चल रहा टाइगर का इंतजार आखिरकार रविवार को खत्म हो गया। महाराष्ट्र के नागपुर जिले स्थित घोड़ेवाला बचाव केंद्र से नर और मादा बाघ का जोड़ा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रेणुकाजी पहुंचा। इसे हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों के लिए किसी चिड़ियाघर में टाइगर का पहला जोड़ा बताया जा रहा है।
यंगवार्ता न्यूज - रेणुकाजी 20 सितंबर :
सिरमौर के प्रसिद्ध रेणुकाजी मिनी जू में लंबे समय से चल रहा टाइगर का इंतजार आखिरकार रविवार को खत्म हो गया। महाराष्ट्र के नागपुर जिले स्थित घोड़ेवाला बचाव केंद्र से नर और मादा बाघ का जोड़ा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रेणुकाजी पहुंचा। इसे हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों के लिए किसी चिड़ियाघर में टाइगर का पहला जोड़ा बताया जा रहा है।
दोनों बाघों ने नागपुर से रेणुकाजी तक करीब 1800 किलोमीटर की दूरी तय की। लगभग 43 घंटे की लंबी यात्रा के दौरान वन्य प्राणी विभाग की टीम लगातार उनके साथ रही। पुलिस सुरक्षा के बीच हुए इस सफर में बाघों के भोजन, आराम और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया।
रेणुकाजी पहुंचने पर वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल रहा। विभाग की ओर से मिठाई बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया।
बताया जा रहा है कि रेणुकाजी में टाइगर लाने के लिए वन विभाग की ओर से करीब एक दशक से प्रयास किए जा रहे थे। बाघों के लिए आधुनिक बाड़ा तैयार किया गया है, जिस पर करीब 1.67 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा वन्य प्राणी अस्पताल की सुविधा भी तैयार की गई है।
टाइगर के इस जोड़े के रेणुकाजी पहुंचने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और मिनी जू में आने वाले पर्यटकों के लिए यह नया आकर्षण बनेगा।
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