राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक छात्र सक्रियता आवश्यक : प्रो. संजय शर्मा

राष्ट्रवाद, नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण में सकारात्मक छात्र सक्रियता की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह विचार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं युवा कार्यक्रम निदेशक तथा एबीवीपी के शिमला विभाग प्रमुख प्रो. संजय शर्मा ने एबीवीपी के 78वें स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर स्टूडेंट्स फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमैनिटी (शोध) फाउंडेशन द्वारा आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए।

Jul 14, 2026 - 20:39
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राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक छात्र सक्रियता आवश्यक : प्रो. संजय शर्मा
यंगवार्ता न्यूज शिमला, 14 जुलाई, 2026 : 
 राष्ट्रवाद, नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण में सकारात्मक छात्र सक्रियता की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह विचार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं युवा कार्यक्रम निदेशक तथा एबीवीपी के शिमला विभाग प्रमुख प्रो. संजय शर्मा ने एबीवीपी के 78वें स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर स्टूडेंट्स फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमैनिटी (शोध) फाउंडेशन द्वारा आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए।

प्रो. शर्मा ने अपने संबोधन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की 78 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज एबीवीपी विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जिसके देशभर में 60 लाख से अधिक तथा हिमाचल प्रदेश में एक लाख से अधिक सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा सुधार, छात्र हित, नेतृत्व विकास और राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने एबीवीपी के विभिन्न आयामों जैसे शोध (SHoDH), स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट (SFD), जिज्ञासा तथा मेडीविजन की जानकारी देते हुए कहा कि ये मंच विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक सोच, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सेवा से जोड़ते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करें तथा शोध, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

व्याख्यान का आयोजन शोध फाउंडेशन द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

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