लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने मंत्रियों और विधायकों की आवाज सुनें मुख्यमंत्री सुक्खू : सुरेश कश्यप

 भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भाजपा की लोकतंत्र बचाओ पदयात्राओं पर की गई टिप्पणी का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को लोकतंत्र की परिभाषा समझाने से पहले अपनी सरकार और कांग्रेस संगठन के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए।

Nov 5, 2026 - 20:58
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यंगवार्ता न्यूज - शिमला, 5 नवंबर 2026 : 


 भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भाजपा की लोकतंत्र बचाओ पदयात्राओं पर की गई टिप्पणी का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को लोकतंत्र की परिभाषा समझाने से पहले अपनी सरकार और कांग्रेस संगठन के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए।

कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू बार-बार भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाते हैं, लेकिन उन्हें यह बताना चाहिए कि उनकी अपनी सरकार में मंत्रियों और विधायकों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने और निर्णय लेने का कितना अधिकार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस सरकार में अनेक जनप्रतिनिधि असंतोष और घुटन महसूस कर रहे हैं। मंत्रियों और विधायकों की शक्तियों को सीमित करने तथा निर्णय प्रक्रिया को मुख्यमंत्री कार्यालय तक केंद्रित करने की प्रवृत्ति ने सरकार के भीतर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कश्यप ने कहा, "मुख्यमंत्री जी, चोरी की बात आपने की है, तो जवाब भी सुन लीजिए। भाजपा पर विधायकों की चोरी का आरोप लगाने से पहले बताइए कि आपके अपने मंत्रियों और विधायकों की निर्णय लेने की शक्ति किसने छीनी? उनके अधिकारों को किसने सीमित किया? लोकतंत्र केवल सत्ता की कुर्सी बचाने का नाम नहीं, बल्कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों की आवाज का सम्मान करने का नाम है।"

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यदि उनकी सरकार में सब कुछ ठीक है, तो कांग्रेस के भीतर समय-समय पर असंतोष और मतभेद क्यों सामने आते रहे हैं।

सुरेश कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री पंचकूला और राज्यसभा चुनाव की घटनाओं का उल्लेख करके अपनी सरकार की वर्तमान कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों से ध्यान नहीं हटा सकते। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री को अपने शासनकाल की जवाबदेही से बचने के लिए केवल पुराने आरोपों का सहारा नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने, जनहित के मुद्दे उठाने और शांतिपूर्ण पदयात्रा करने का पूरा अधिकार है। भाजपा की लोकतंत्र बचाओ पदयात्राएं इसी लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा हैं।

कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री को विपक्ष की पदयात्राओं पर टिप्पणी करने के बजाय प्रदेश की जनता, कर्मचारियों, पेंशनरों और युवाओं की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली कसौटी यह है कि सरकार अपने ही जनप्रतिनिधियों की आवाज कितनी सुनती है और जनता के प्रति कितनी जवाबदेह रहती है।

अंत में सुरेश कश्यप ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और जनता के हितों के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। मुख्यमंत्री सुक्खू को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय अपनी सरकार के भीतर पारदर्शिता, संवाद और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

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