हाईकोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को करवाने के लिए दायर याचिका पर करीब तीन घंटे तक हुई बहस 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को समय पर करवाने के लिए दायर याचिका पर करीब तीन घंटे तक बहस हुई

Jan 3, 2026 - 15:05
Jan 3, 2026 - 16:05
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हाईकोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को करवाने के लिए दायर याचिका पर करीब तीन घंटे तक हुई बहस 

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    03-01-2026

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को समय पर करवाने के लिए दायर याचिका पर करीब तीन घंटे तक बहस हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत और जिला परिषदों के पुनर्सीमांकन को लेकर जारी अधिसूचना को एक अन्य खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है और 10 जनवरी तक लोगों को आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया है। 

ऐसी परिस्थितियों में नियमों के अनुसार चुनाव करवाने के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में समय पर चुनाव करवाना संभव नहीं है। दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार जानबूझकर चुनाव करवाने में आनाकानी कर रही है। पुनर्सीमांकन वाली जो अधिसूचना रद्द की गई है, वह केवल जिला परिषद शिमला से संबंधित है।

अब मामले की सुनवाई मंगलवार को न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ करेगी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जिला परिषद पुनर्सीमांकन वाली याचिका में चुनाव आयोग को पार्टी न बनाने पर मामले को उसी खंडपीठ को भेजा है, जिसने मामला पहले सुना है। 

खंडपीठ ने कहा कि यह एक सांविधानिक मुद्दा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार पंचायत चुनाव हिमाचल में आई आपदा की वजह से टाल रही है, वहीं दूसरी ओर एक अलग खंडपीठ ने पंचायत, जिला परिषद पुनर्सीमांकन वाले संशोधित रूल को खारिज कर दिया है। ऐसी परिस्थितियों में यह सही रहेगा कि मामले की सुनवाई वही खंडपीठ करे, जिसने देवेंद्र सिंह नेगी मामले में पुनर्सीमांकन वाली अधिसूचना को खारिज किया है।

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