कर्मचारियों के मुद्दों पर स्वयं हस्तक्षेप करे मुख्यमंत्री , हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के सिरमौर के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने की मांग 

एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में पेंशन कम्युटेशन बंद करने के समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ एवं हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के सिरमौर जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए

Apr 21, 2025 - 19:42
Apr 21, 2025 - 20:06
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कर्मचारियों के मुद्दों पर स्वयं हस्तक्षेप करे मुख्यमंत्री , हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के सिरमौर के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने की मांग 
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  21-04-2025

एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में पेंशन कम्युटेशन बंद करने के समाचार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ एवं हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के सिरमौर जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर गंभीर विचार विमर्श हेतु सभी कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त बैठक का समय देने की अपील की। 
संघ अध्यक्ष ने कहा कि यद्यपि प्रदेश के 95%  कर्मचारियों हेतु पुरानी पेंशन बहाल कर निश्चित रूप से  सरकार ने अपनी पहली चुनावी गारंटी को पूरा किया है , परंतु शेष बचे कर्मचारियों की पेंशन बहाली , कर्मचारियों के 2016 से संशोधित वेतनमान का लंबित एरियर , जनवरी 2023 से लंबित महंगाई भत्ते की तीन किश्तें अभी भी बकाया है। साथ ही विभिन्न विभागों के विभागीय मसलों पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित होना नितांत आवश्यक हैं। इस हालात में यदि पेंशन कम्युटेशन को भी बंद करने का निर्णय लिया जाता हैं तो निश्चित रूप से इसका विपरीत प्रभाव सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों पर पड़ना अवश्यंभावी हैं। 
साथ ही पेंशन हेतु 25 वर्ष का कार्यकाल करना भी वर्तमान परिस्थितियों में उचित नहीं जब बहुत लंबी उम्र के बाद युवा सेवाओं में आते हैं तथा उसके बाद 2 से आठ आठ वर्षों तक अनुबंध पर सेवाएं देनी पड़ती हैं। इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव चतुर्थ तथा तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका अधिकतर सेवाकाल अस्थाई अथवा दैनिक भोगी होता है। फलस्वरूप इस तथाकथित प्रस्तावित निर्णय से अधिकतर कर्मचारी को पुरानी पेंशन के पूर्ण लाभ से वंचित होने का भय सता रहा है। 

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