सावधान : वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग से भी खाते खाली कर रहे साइबर ठग
साइबर ठग लोगों से ठगी करने के नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं। वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग स्कैम के जरिये अब लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये की राशि निकाली जा रही
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 04-02-2026
साइबर ठग लोगों से ठगी करने के नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं। वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग स्कैम के जरिये अब लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये की राशि निकाली जा रही है। इस तरह के एक मामले में शिमला शहर के एक बुजुर्ग के खाते से अनजान कॉल आने के बाद दस लाख रुपये निकल गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसे एक अनजान नंबर से फोन आया और उनके खाते से दस लाख रुपये की रकम निकल गई। यह मामला राजधानी के छोटा शिमला क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक बुजुर्ग का दावा है कि उनके पास न तो कोई ओटीपी आया न ही उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया था। एक मोबाइल फोन कॉल आई थी जिसे उठाने के बाद उनके खाते से तुरंत दस लाख रुपये निकलने के मैसेज आए।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक साइबर अपराधी आपको फोन करके किसी जानकार से बात करवाने और अन्य तरह से झांसे में देकर कॉल मर्ज करने के लिए बोलते हैं। व्यक्ति कॉल मर्ज करता है तो उसका फोन बैंक ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम से जुड़ जाता है।
ठग कॉल मर्ज के लिए नहीं बल्कि बैंक ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम की रिक्वेस्ट भेजते हैं। इसके बाद ठग आपका खाता खाली कर देते हैं। इस तरह से कई बार साइबर अपराधी एक विशेष प्रकार का कोड नंबर दबाने के लिए कहते हैं।
ऐसा करने से भी कॉल फाारवर्ड हो जाती है और व्यक्ति की सभी कॉल तथा मैसेज उस नंबर पर चले जाते हैं। इससे साइबर ठग ओटीपी जनरेट करके बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं। शिमला पुलिस की टीम के साथ ही अब साइबर विंग की टीम भी इस मामले की जांच कर रही है। इसमें उन बैंक खातों की जांच की जा रही है, जिसके जरिये राशि एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर की गई है।
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