रंग लाने लगे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास , गुमराला महिला दुग्ध उत्पादक केंद्र ने 3 लाख लीटर से अधिक दूध का किया विक्रय 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का लाभ सहकारी सभा समितियों तक पहुंच रहा है। दूध के दाम में की गई ऐतिहासिक वृद्धि से दुग्ध उत्पादक खुश हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के साथ ही दूध का उत्पादन भी उत्तरोत्तर बढ़ा है

Apr 1, 2025 - 17:46
Apr 1, 2025 - 19:37
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रंग लाने लगे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास , गुमराला महिला दुग्ध उत्पादक केंद्र ने 3 लाख लीटर से अधिक दूध का किया विक्रय 
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यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी  01-04-2025
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का लाभ सहकारी सभा समितियों तक पहुंच रहा है। दूध के दाम में की गई ऐतिहासिक वृद्धि से दुग्ध उत्पादक खुश हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के साथ ही दूध का उत्पादन भी उत्तरोत्तर बढ़ा है। सराज विधानसभा क्षेत्र की महिला दुग्ध उत्पादक एवं क्रय विक्रय सहकारी सभा समिति (घुमराला) जरोल दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां प्राप्त कर रही है। समिति के सचिव सुशील कुमार ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अधिकतर लोग खेती-बाड़ी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जिसमें पशुपालन भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है। हर घर-द्वार में दूध का उत्पादन अच्छे स्तर पर होता है परंतु दूध की मांग गांव स्तर पर कम होती है। 
इसी को देखते हुए वर्ष 2003 में गांव के कुछ लोगों के सहयोग से घुमराला महिला उत्पादक क्रय एवं विक्रय सहकारी सभा समिति का गठन किया गया। पहले दिन मात्र 7 लीटर दूध एकत्रित किया गया। उस समय यह एक मुश्किल दौर लग रहा था, परंतु समिति ने कार्य करना निरंतर जारी रखा और आज यह सहकारी सभा सराज विधानसभा क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक के रूप में बेहतरीन कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादक केंद्र में काम करते हुए उन्हें लगभग 20 वर्ष हो गए हैं। पूर्व में सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष में दूध के दाम में लगभग 1 से 2 रुपये वृद्धि की जाती थी, परंतु वर्ष 2022 से हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार द्वारा किसानों, बागवानों व दुग्ध उत्पादकों के लिए जो कार्य किए गए हैं, वह बहुत ही सराहनीय हैं। मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादकों के हितों को देखा व उनके दर्द को समझा, उन्हें मालूम है कि एक पशुपालक को दूध के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। 
पशु आहार, फीड में खर्च काफी बढ़ गए हैं। इसलिए पिछले वित्तीय वर्ष में दूध के मूल्य में एक साथ 13 रुपये की वृद्धि की तथा इस वर्ष बजट भाषण में उन्होंने दूध के मूल्य में  6 रुपये की और वृद्धि की, जिससे आज के समय में गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये तथा भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपए हो गया है।  इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री  सुखविंद्र सिंह सुक्खू का अपनी और सहकारी सभा की ओर से धन्यवाद किया। सहकारी सभा के प्रधान दुग्ध उत्पादक कल्याण सिंह, दुर्गी देवी गाँव चापड, शयाणु राम गाँव चापड, नैणी देवी गांव बजौण लाभार्थियों ने  भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उप प्रधान कंम्पा देवी, सदस्य हेमलता का कहना है कि उनके गाय के दूध में फैट की मात्रा काफी बेहतर पाई गई जिससे उन्हें आज भी प्रति लीटर दूध के  दुग्ध केंद्र में 58 से 60 रुपये प्राप्त होते हैं। 
सुशील कुमार ने बताया कि इस केंद्र में लगभग 7 से 8 किलोमीटर दूर से लोग दूध लाते हैं। वर्ष 2003 में 7 लीटर से शुरू किए गए इस दुग्ध उत्पादक केंद्र में गत वर्ष 2024 में जून-जुलाई के पीक सीजन में प्रतिदिन 1750 लीटर दूध पशुपालकों से प्राप्त हुआ। यह केंद्र अभी तक 824 पशुपालकों को अपने साथ जोड़कर लाभ प्रदान कर चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में घुमराला दुग्ध केंद्र द्वारा 3 लाख लीटर से अधिक दूध इकट्ठा किया गया, जिसका मूल्य 1 करोड़ 30 लाख रुपए के लगभग होता है। केंद्र की अभी तक कुल बिक्री आय 3 करोड़ रुपए से अधिक हो जाती है। 
उन्होंने बताया कि दुग्ध क्रय विक्रय केंद्र को आगे ले जाने के लिए सभा समिति द्वारा केंद्र में पनीर, खोआ, घी, दही, कुल्फी भी बनाना आरंभ कर दिए गए हैं, ताकि दुग्ध केंद्र और बेहतरी से कार्य करे और केंद्र की आय में भी वृद्धि हो। उन्होंने बताया की सहकारी सभा समिति द्वारा लाभांश का आवंटन सदस्यों में करने के साथ ही प्रस्ताव के माध्यम से 40 हज़ार रुपये सभा समिति के पास नकद में रखे जाते हैं ताकि किसी किसान दुग्ध उत्पादक को जरूरत पड़ने पर उसकी मदद की जा सके। चूंकि दुग्ध उत्पादक व्यवसाय में एक खेती-बाड़ी से जुड़ा व्यक्ति  आर्थिक रूप से इतना सशक्त नहीं होता और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद की जा रही है। 

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