यंग्वारता न्यूज़ - शिमला 03-02-2026
देश का पहला गोकुल धाम हिमाचल प्रदेश में बना है, जिसका संचालन भी शुरू हो गया है। अब प्रदेश में इस तरह के गोकुल धाम और भी बनाए जाएंगे, जिसके लिए जमीन की जरूरत होगी। जानकारी के अनुसार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने देश का पहला गोकुल धाम हिमाचल प्रदेश के कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर तैयार कर दिया है। फोरलेन पर घूमने वाले बेसहारा गौवंश के लिए एनएचएआई की अपने आप में यह एक अनूठी पहल है। गोकुलधाम में एक साथ 100 बेजुबानों को रखने की व्यवस्था रहेगी। बहरहाल एनएचएआई प्रबंधन ने गोकुल धाम का संचालन भी आरंभ कर दिया है। प्रदेश में इस तरह के और गोकुल धाम भी प्रबंधन बनाएगा, बशर्ते इसके लिए जमीन मुहैया करवानी होगी। दरअसल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फोरलेन पर बेसहारा पशुओं के कारण होनी वाली सडक़ दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए देश में एक अनूठी पहल की है।
जिसके तहत फोरलेन पर बेसहारा पशुओं के बसेरे के लिए गोकुल धाम का निर्माण किया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने देश में अपनी इस अनूठी पहल की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के कीरतपुर-नेरचौक से कर दी है। गोकुल धाम के निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी गाबर के तहत एक एमओयू साइन किया है। इसके तहत कंपनी ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर बेसहारा पशुओं के लिए आधुनिक गौशाला का निर्माण किया है। सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत प्रबंधन की ओर है यह अहम कदम उठाया है। फोरलेन में टीहरा टनल के पास गोकुल धाम का निर्माण कर इसका संचालन भी आरंभ कर दिया गया है। बड़ी बात यह है कि देश में इस दिशा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की पहल प्रदेश के कीरतपुर नेरचौक फोरलेन से की गई है। एनएचएआई के मुताबिक इस फोरलेन पर घूमने वाले पशुओं को आश्रय के लिए दो शेड बनाए गए हैं। एक शेड में पचास बेसहारा पशुओं को रखने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा बेसहारा पशुओं के उपचार के लिए डिस्पेंसरी , डॉक्टर और एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई है। बेसहारा पशुओं के चारे का प्रबंध भी संबंधित कंपनी कर रही है। अहम है कि इस फोरलेन पर किसी वाहन की चपेट में आने वाले बेसहारा पशु को तत्काल एंबुलेंस के जरिए मौके पर उपचार मुहैया करवाने के साथ साथ गोकुल धाम तक पहुंचाया जाएगा। गोकुल धाम को वैज्ञानिक और सुविधाजनक तरीके से बनाया गया है, ताकि ठंड और बारिश से भी बेसहारा पशुओं को बचाया जा सकें। साथ ही पशुओं के लिए चारे की फीडिंग ट्रॉली, पानी की खेली और उनके बैठने के लिए पक्का फर्श के अलावा जमीन पर रेत डालकर उसे तैयार किया गया है। गोकुलधाम में गोबर और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भी विशेष ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश में बनने जा रही फोरलेन परियोजना के साथ साथ कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर और गोकुलधाम बनाने की भी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की योजना है।
प्रबंधन का कहना है कि फोरलेन के किनारे गोकुल धाम के लिए जमीन मिलती है , तो यहां पर बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय की व्यवस्था की जाएगी। प्रबंधन का कहना है कि सीएसआर के तहत यह कदम उठाए जा रहे हैं। एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला के अधिकारी कर्नल अजय सिंह बरगोती का कहना है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत बेसहारा पशुओं के लिए गोकुल धाम बनाया है। एनएचएआई का देश में यह पहला गोकुलधाम है। अगर जमीन की व्यवस्था होती है, तो प्रबंधन और गोकुल धाम की स्थापना करेगा।