यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन 02-08-2026
जिला मुख्यालय नाहन में रविवार को हजरत इमाम हुसैन की याद में चेहल्लुम का ताजिया पूरे धार्मिक सम्मान और अकीदत के साथ निकाला गया। मोहर्रम के 40 दिन बाद निकाले जाने वाले चेहल्लुम के मौके पर बड़ी संख्या में सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया और कर्बला के शहीदों, विशेषकर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। ताजिया जुलूस पारंपरिक मार्गों से होकर गुजरा, जहां जगह-जगह लोगों ने इसका स्वागत किया। इस दौरान समुदाय के लोगों ने शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।
धार्मिक कार्यक्रमों में इमाम हुसैन की कुर्बानी और उनके बताए सत्य एवं न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश भी दिया गया। मान्यता के अनुसार चेहल्लुम, मोहर्रम की 10वीं तारीख (आशूरा) को हुई कर्बला की घटना के 40 दिन बाद मनाया जाता है। इसी के साथ मोहर्रम के दौरान आयोजित होने वाली धार्मिक गतिविधियों का भी समापन माना जाता है। चेहल्लुम के अवसर पर नाहन में प्रशासन की ओर से सुरक्षा के उचित प्रबंध किए गए थे। जुलूस शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ और अंत में मुल्क में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ की गई। मीडिया से बात करते हुए ताजिया आयोजन कमेटी के सदस्य कैप्टन सलीम ने बताया कि मोहर्रम के 40 दिन बाद चेहल्लुम मनाया जाता है। जो इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिवार के सदस्यों की कर्बला से दमिश्क तक की यात्रा के अंत का प्रतीक है। इसमें इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए शोक मनाया जाता है।
इसी कड़ी में नाहन में यह चेहल्लुम का सफर गन्नू घाट से कच्चा टैंक के लिए शुरू हुआ जो हरिपुर मोहल्ला रानीताल होते हुए शाम को जामा मस्जिद कच्चा टैंक पहुंचेगा और यहां अजान के बाद यह सफर समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि यहां पर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है और उनको श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उन्होंने बताया कि शहादत के इस कार्यक्रम में नाहन के सभी चार मोहल्लों के इमाम हुसैन को मानने वाले लोग शामिल होते हैं। इस अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा इमाम हुसैन की आत्मिक शांति के लिए छबील लगाई गई जहां इस यात्रा में शामिल लोगों ने शरबत ग्रहण किया।