नारीवाला में कथित अवैध पेड़ कटान पर फिर बवाल, मामले को लेकर नाथू राम चौहान मीडिया से हुए रूबरू

नारीवाला क्षेत्र में पिछले लगभग एक वर्ष से चल रहे कथित अवैध पेड़ कटान के विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। क्षेत्र के ग्रामीणों, महिलाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग एवं संबंधित एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कटान का विरोध तेज कर दिया है

Jun 8, 2026 - 18:45
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नारीवाला में कथित अवैध पेड़ कटान पर फिर बवाल,  मामले को लेकर नाथू राम चौहान मीडिया से हुए रूबरू

यंगवार्ता न्यूज पांवटा साहिब, 8 जून, 2026 : 

नारीवाला क्षेत्र में पिछले लगभग एक वर्ष से चल रहे कथित अवैध पेड़ कटान के विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। क्षेत्र के ग्रामीणों, महिलाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग एवं संबंधित एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कटान का विरोध तेज कर दिया है। इस मामले को लेकर समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् नाथूराम चौहान ने पांवटा साहिब में प्रेस वार्ता आयोजित कर कई सवाल उठाए।

जानकारी के अनुसार, नारीवाला में प्रस्तावित पेड़ कटान के विरोध में स्थानीय महिलाओं ने पहले पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया था। ग्रामीणों का दावा है कि बाद में इन रक्षा सूत्रों को काट दिया गया, जिसके विरोध में लोगों ने मौके पर शस्त्र पूजन कर आंदोलन को नया स्वरूप दिया। ग्रामीणों के अनुसार, इसके बाद कुछ समय के लिए पेड़ों की कटाई रुक गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि 5 और 6 जून की मध्यरात्रि, जब देशभर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा था और पर्यावरण संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे थे, उसी दौरान नारीवाला क्षेत्र में दर्जनों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। इस कार्रवाई का नाथूराम चौहान सहित नारीवाला और आसपास की पंचायतों के लोगों ने विरोध किया।

प्रेस वार्ता में नाथूराम चौहान ने आरोप लगाया कि जिस एफआरसी (Forest Rights Committee) कमेटी का हवाला देकर कटान और सड़क निर्माण की प्रक्रिया को उचित ठहराया जा रहा है, वह कमेटी ही संदिग्ध है। उन्होंने दावा किया कि कमेटी के दस्तावेजों में कुछ मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, जबकि कुछ ऐसे लोगों के भी अंग्रेजी में हस्ताक्षर दिखाए गए हैं जो सामान्यतः अंगूठा लगाते हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, कटान पर तत्काल रोक तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मामले में वन विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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