हिमाचल में कांग्रेस की ‘महाभ्रष्ट सरकार’, खनन से नौकरियों तक सत्ता के संरक्षण में उठ रहे गंभीर सवाल : राजिंदर राणा

भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजिंदर राणा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में आज ऐसी सरकार काम कर रही है जिसके शासन में भू-माफिया, जल-माफिया और खनन से जुड़े मामलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इसे कांग्रेस की “महाभ्रष्ट सरकार” बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप अब केवल विपक्ष के भाषणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मंत्रियों से जुड़े प्रकरणों और उनके अपने सार्वजनिक बयानों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Sep 6, 2026 - 17:53
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हिमाचल में कांग्रेस की ‘महाभ्रष्ट सरकार’, खनन से नौकरियों तक सत्ता के संरक्षण में उठ रहे गंभीर सवाल : राजिंदर राणा

यंगवार्ता न्यूज - शिमला, 6 सितंबर : 


भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजिंदर राणा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में आज ऐसी सरकार काम कर रही है जिसके शासन में भू-माफिया, जल-माफिया और खनन से जुड़े मामलों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इसे कांग्रेस की “महाभ्रष्ट सरकार” बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप अब केवल विपक्ष के भाषणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मंत्रियों से जुड़े प्रकरणों और उनके अपने सार्वजनिक बयानों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राणा ने कहा कि कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से संबंध रखने वाले आयुष एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा को लेकर हाल ही में जयसिंहपुर के पूर्व विधायक रविंद्र धीमान ने RTI दस्तावेजों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जयसिंहपुर में प्रस्तावित महा माया स्टोन क्रशर की पार्टनरशिप डीड में गोमा की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज होने की बात सामने आई है। स्वयं गोमा ने भी मीडिया के समक्ष स्टोन क्रशर में अपनी हिस्सेदारी होने की बात स्वीकार की है, हालांकि उन्होंने किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से इनकार करते हुए इसे कानून के अनुरूप बताया है। 

राजिंदर राणा ने कहा कि सवाल यह है कि सरकार में मंत्री रहते हुए किसी व्यावसायिक परियोजना में इतनी बड़ी हिस्सेदारी होने पर हितों के टकराव, नियमों के पालन और सरकारी निगरानी से जुड़े प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर कौन देगा? भाजपा पहले ही मांग कर चुकी है कि स्टोन क्रशर से संबंधित पार्टनरशिप डीड, खनन लीज, पर्यावरण स्वीकृतियां, भूमि रिकॉर्ड और अन्य अनुमतियों की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कर पूरी स्थिति जनता के सामने रखी जाए। मंत्री ने आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा है कि यदि कोई गलत काम साबित होता है तो वह कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में “नौकरी वितरण केंद्र” जैसी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। उद्योग, संसदीय कार्य एवं श्रम-रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान को लेकर जुलाई में विवाद तब सामने आया जब उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में करीब 700 युवाओं को आउटसोर्स आधार पर रोजगार दिलाने की बात कही। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मंत्री ने लगभग 85 नियुक्तियां स्कूलों और करीब 67 जल शक्ति विभाग में होने की जानकारी भी दी थी। चौहान ने इन नियुक्तियों का बचाव करते हुए कहा था कि वे निर्धारित आउटसोर्स प्रक्रिया और सरकारी स्वीकृति के तहत हुईं तथा अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने में कुछ गलत नहीं है। भाजपा ने इसे लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। 

राणा ने कहा कि यदि एक मंत्री सार्वजनिक रूप से सैकड़ों लोगों को अपने प्रयास या सिफारिश से नौकरी दिलाने की बात करता है तो प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि इन पदों के लिए आवेदन कब मांगे गए, चयन का आधार क्या था, मेरिट कैसे तय हुई और प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को समान अवसर मिला या नहीं। रोजगार किसी मंत्री की कृपा से मिलने वाली वस्तु नहीं, बल्कि पात्र युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से मिलने वाला अवसर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्थिति तब और गंभीर दिखाई देती है जब विधानसभा में राज्य चयन आयोग की भर्तियों से संबंधित जानकारी मांगने पर सरकार ने कहा कि विस्तृत सूचना अभी संकलित की जा रही है और इसे मार्च 2027 में उपलब्ध करवाया जाएगा। भाजपा विधायकों ने विधानसभा में इस बात पर भी आपत्ति जताई कि यही जानकारी पिछले सत्रों से मांगी जा रही है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि सरकार कोई तथ्य छिपाना नहीं चाहती और व्यापक जानकारी एकत्र की जा रही है। 

राजिंदर राणा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय इन सवालों का दस्तावेजों के साथ जवाब देना चाहिए। एक तरफ मंत्री से जुड़े स्टोन क्रशर में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी का मामला सामने आता है और दूसरी तरफ मंत्री द्वारा अपने क्षेत्र में 700 लोगों को आउटसोर्स रोजगार दिलाने का दावा किया जाता है। इन दोनों मामलों में स्वतंत्र जांच और पूरी पारदर्शिता ही सरकार की नीयत को स्पष्ट कर सकती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि स्टोन क्रशर से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और आउटसोर्स नियुक्तियों की भी विभागवार सूची, चयन प्रक्रिया, योग्यता तथा नियुक्ति का आधार जनता के सामने रखा जाए। *हिमाचल के प्राकृतिक संसाधन और सरकारी रोजगार किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की निजी जागीर नहीं हैं। प्रदेश की जनता प्रत्येक निर्णय का हिसाब मांग रही है और कांग्रेस सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा।*

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