प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदर्शन पर शिक्षा निदेशालय की रोक, निर्देश न मानने पर कार्रवाई की चेतावनी

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ (एचपीपीटीएफ) के आंदोलन पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। संघ के पदाधिकारी नई स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली के विरोध में कई दिनों से निदेशालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। निदेशालय ने इसे सेवा आचरण नियमों और बच्चों के शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लंघन बताया है। निदेशालय के अनुसार, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली का उद्देश्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है। इ

Nov 7, 2026 - 17:22
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प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदर्शन पर शिक्षा निदेशालय की रोक, निर्देश न मानने पर कार्रवाई की चेतावनी

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ (एचपीपीटीएफ) के आंदोलन पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। संघ के पदाधिकारी नई स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली के विरोध में कई दिनों से निदेशालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। निदेशालय ने इसे सेवा आचरण नियमों और बच्चों के शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लंघन बताया है। निदेशालय के अनुसार, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली का उद्देश्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है। इस संबंध में गठित समिति ने महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की चर्चाएं की हैं। उन्हें स्पष्ट किया गया था कि इस प्रणाली का शिक्षकों की पदोन्नति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। दिशा-निर्देशों के हर प्रावधान को विस्तार से समझाया गया, लेकिन प्रतिनिधि अपनी मांग पर अड़े रहे। पिछले कई दिनों से प्रतिदिन पांच से दस शिक्षक प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। इससे छह से चौदह वर्ष के बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। छुट्टी का दुरुपयोग कर सरकार के खिलाफ आंदोलन करना स्वीकार्य नहीं है।

निदेशालय ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 का नियम सात सरकारी कर्मचारियों को सेवा या सरकारी नीतियों से संबंधित प्रदर्शन या हड़ताल में भाग लेने से रोकता है। प्रस्तावित आंदोलन इस वैधानिक निषेध का स्पष्ट उल्लंघन है। नियम नौ सरकारी कर्मचारियों को सरकार, उसकी नीतियों या कार्यों की आलोचना करने वाले किसी भी बयान या सार्वजनिक टिप्पणी से मना करता है। यह नियोजित आंदोलन सार्वजनिक आलोचना को दर्शाता है और इस प्रावधान का उल्लंघन करता है।

निदेशालय ने संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों को तत्काल आंदोलन समाप्त करने का निर्देश दिया है। उन्हें किसी भी अनधिकृत विरोध, प्रदर्शन या सरकारी नीति की सार्वजनिक आलोचना से दूर रहने को कहा गया है। इन निर्देशों का पालन न करने पर इसे कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। इसे घोर अवज्ञा और कदाचार के रूप में देखा जाएगा, जिसके तहत बिना किसी और सूचना के सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने स्कूल कॉम्प्लेक्स सिस्टम को लागू करने के विरोध में 15 नवंबर को धर्मशाला में एक सार्वजनिक आंदोलन की घोषणा की है। निर्देशालय ने कहा कि मसले को सुलझाने के लिए गठित समिति की ओर से कई दौर की बातचीत की गई है और सभी जायज शिकायतों को दूर करने व उनका समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं। सभी संबंधित पक्षों को बार-बार स्पष्ट किया गया है कि स्कूल कॉम्प्लेक्स सिस्टम से किसी भी श्रेणी के शिक्षकों की पदोन्नति (प्रमोशन) के अवसरों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही, दिशा-निर्देशों के हर प्रावधान को संघ के प्रतिनिधियों के सामने विस्तार से समझाया गया है। सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के इन तमाम प्रयासों के बावजूद, संघ प्रतिनिधि अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

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