एसएफडी ने चलाया 'सकोरा अभियान' — पक्षियों को भीषण गर्मी से बचाने की अनूठी पहल

शिमला  6 मई 2026 :  आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एस.एफ.डी. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा एक सराहनीय एवं मानवीय पहल के अंतर्गत 'सकोरा अभियान' का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर मिट्टी के सकोरे (पक्षियों के लिए पानी के पात्र) रखे गए, ताकि भीषण गर्मी की मार झेल रहे पक्षियों की प्यास बुझाई जा सके और उनकी जान बचाई जा सके। इस अभियान के अंतर्गत इकाई के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में पेड़-पौधों के निकट, भवनों की छतों पर एवं अन्य उचित स्थानों पर सकोरे स्थापित किए। इसके साथ ही, इकाई द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यों (प्राध्यापकों) को भी सकोरे भेंट किए गए और उनसे अपने-अपने घरों में भी सकोरे लगाने का विनम्र आग्रह किया गया, जिससे यह अभियान केवल विश्वविद्यालय परिसर तक ही सीमित न रहकर समाज के व्यापक स्तर तक पहुंच सके। इकाई ने आम जनमानस से भी भावभीना अपील की है कि वे अपने घरों, बालकनियों, आंगन एवं छतों पर पक्षियों के लिए पानी से भरे सकोरे अवश्य रखें। गर्मी के इस कठिन मौसम में पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक छोटा किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण मानवीय कर्तव्य है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहायक है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। "पक्षी हमारी प्रकृति के अभिन्न अंग हैं। उनकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है। इस भीषण गर्मी में एक सकोरा रखकर हम किसी की जान बचा सकते हैं — यही इस अभियान का संदेश है।" अभाविप के इस 'सकोरा अभियान' का उद्देश्य है कि समाज में पर्यावरण प्रेम एवं जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का भाव जागृत हो। विद्यार्थी परिषद का मानना है कि युवाशक्ति यदि ऐसे छोटे-छोटे सकारात्मक कदम उठाए, तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। इकाई आगे भी इस प्रकार के जनजागरण एवं पर्यावरण हित के अभियान चलाती रहेगी।

May 6, 2026 - 17:46
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एसएफडी ने चलाया 'सकोरा अभियान' — पक्षियों को भीषण गर्मी से बचाने की अनूठी पहल
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शिमला  6 मई 2026 : 


आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एस.एफ.डी. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा एक सराहनीय एवं मानवीय पहल के अंतर्गत 'सकोरा अभियान' का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर मिट्टी के सकोरे (पक्षियों के लिए पानी के पात्र) रखे गए, ताकि भीषण गर्मी की मार झेल रहे पक्षियों की प्यास बुझाई जा सके और उनकी जान बचाई जा सके।

इस अभियान के अंतर्गत इकाई के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में पेड़-पौधों के निकट, भवनों की छतों पर एवं अन्य उचित स्थानों पर सकोरे स्थापित किए। इसके साथ ही, इकाई द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यों (प्राध्यापकों) को भी सकोरे भेंट किए गए और उनसे अपने-अपने घरों में भी सकोरे लगाने का विनम्र आग्रह किया गया, जिससे यह अभियान केवल विश्वविद्यालय परिसर तक ही सीमित न रहकर समाज के व्यापक स्तर तक पहुंच सके।

इकाई ने आम जनमानस से भी भावभीना अपील की है कि वे अपने घरों, बालकनियों, आंगन एवं छतों पर पक्षियों के लिए पानी से भरे सकोरे अवश्य रखें। गर्मी के इस कठिन मौसम में पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक छोटा किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण मानवीय कर्तव्य है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहायक है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।

"पक्षी हमारी प्रकृति के अभिन्न अंग हैं। उनकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है। इस भीषण गर्मी में एक सकोरा रखकर हम किसी की जान बचा सकते हैं — यही इस अभियान का संदेश है।"

अभाविप के इस 'सकोरा अभियान' का उद्देश्य है कि समाज में पर्यावरण प्रेम एवं जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का भाव जागृत हो। विद्यार्थी परिषद का मानना है कि युवाशक्ति यदि ऐसे छोटे-छोटे सकारात्मक कदम उठाए, तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। इकाई आगे भी इस प्रकार के जनजागरण एवं पर्यावरण हित के अभियान चलाती रहेगी।

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