सनौरा-नेरीपुल सड़क के लिए दो सौ करोड़ रुपये स्वीकृत , कांग्रेस भाजपा में लगी श्रेय लेने की होड़

राजगढ़ उप मंडल से गुजरने वाले कुम्हारहटटी - यशवंतनगर-नेरीपुल -छैला सड़क के सुधारीकरण के लिए भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा सीआरआईएफ के तहत 200 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के उपरांत भाजपा और कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़ लगी है। हालांकि इस सड़क के लिए भाजपा कार्यकाल में कोई डीपीआर तैयार नहीं गई है , परंतु जब भी किसी प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से मंजूरी मिलती है उसका श्रेय लेने के लिए भाजपा सबसे अग्रिम पंक्ति में होती है।

Feb 4, 2026 - 01:06
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सनौरा-नेरीपुल सड़क के लिए दो सौ करोड़ रुपये स्वीकृत , कांग्रेस भाजपा में लगी श्रेय लेने की होड़
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यंगवार्ता न्यूज़ - राजगढ़  03-02-2026
राजगढ़ उप मंडल से गुजरने वाले कुम्हारहटटी - यशवंतनगर-नेरीपुल -छैला सड़क के सुधारीकरण के लिए भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा सीआरआईएफ के तहत 200 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के उपरांत भाजपा और कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़ लगी है। हालांकि इस सड़क के लिए भाजपा कार्यकाल में कोई डीपीआर तैयार नहीं गई है , परंतु जब भी किसी प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से मंजूरी मिलती है उसका श्रेय लेने के लिए भाजपा सबसे अग्रिम पंक्ति में होती है। अधिशासी अभियंता लोक निर्माण मंडल राजगढ़ पवन गर्ग के अनुसार इस रोड़ के सुधारीकरण हेतू विभाग ने वर्ष 2024 में डीपीआर तैयार करके राज्य सरकार को भेजी थी जिसके चलते भारत सरकार ने इस सड़क के लिए 200 करोड़ देने की मोहर लगा दी। 
एक्सियन के मुताबिक नेरीपुल से सनौरा तक केवल 37 किलोमीटर सड़क के हिस्से को पक्का व तथा जो मोड़ तंग है उन्हें इस प्रोजेक्ट के तहत चौड़ा किया जाएगा। जिसमें तीन छोटे पुल पैरवी खडड, जघेड़ नाला और बझेतु खडड पर पुल का निर्माण करना प्रस्तावित है। बता दें कि सेब सीजन के दौरान हर वर्ष सनौरा से नेरीपुल वाले हिस्से में काफी दुर्घटनाएं होती है चूंकि कई स्थानों पर मोड़ काफी तंग है और वाहनों को साईड देते हुए ओवर र्लोिडड ट्रक अनियंत्रित होकर गिरि नदी में पहूंच जाते हैं। प्रशासन द्वारा भी सड़क के इस हिस्से को एक्सिडेंटल जोन के दर्जें में रखा गया है। इससे पहले भी इस सड़क के सुधारीकरण के लिए 46 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2020 में इस सड़क को पक्का व चौड़ा  करने का कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा  गया था। इस दौरान भी निजी कंपनी द्वारा की गई टायरिंग केवल तीन माह के अंतराल में उखड़ गई थी।
जिस पर लोगों ने भारी विरोध किया जिसके चलते इस सड़क पर कंपनी को दुबारा टायरिंग करनी पड़ी थी अर्थात इस धनराशि का उपयोग इस सड़क के सुधारीकरण पर सही परिप्रेक्ष्य में नहीं हुआ था। यही नहीं लोक निर्माण विभाग की डीपीआर के अनुसार इस सड़क को केवल नौ टन भार क्षमता वाले वाहनों के लिए बनाया गया था जबकि इस रोड़ पर 30 से 40 टन भार क्षमता के ट्रॉलों की आवाजाही सेब सीजन में बरकरार रहती है। जिस कारण सड़के उखड़ जाती है। अब सवाल उठता है कि क्या 200 करोड़ से इस सड़क से इस सड़क की काया पलट होगी अथवा बीते जुलाई 2025 में संपन हुए 46 करोड़ प्रोजेक्ट की तरह इस सड़क की दुदर्शा ऐसी रहेगी। 
गौर रहे कि छैला - नेरीपुल-सनौरा - ओच्छघाट-कुम्हारहटटी रोड़ एक ऑल वेदर रोड़ है और अपर शिमला का सारा सेब इस रोड़ के माध्यम से देश की विभिन्न मंडियों में पहूंचता है । इसके बावजूद भी इस सड़क का स्तर नहीं बढ़ाया है अपितु सरकार ने स्टेट हाई वे से इस रोड़ को काफी वर्ष पहले  मेजर डिस्ट्रिट रोड़ बना दिया है। एक्सियन लोनिवि का कहना है कि 200 करोड़ मिलने के बाद भी इस रोड़ का स्तर एमडीआर ही रहेगा। राजगढ़ ब्लॉक के लोगों का कहना है कि दोनों राजनैतिक पार्टियां श्रेय लेने की बजाए सड़क के निर्माण कार्यों में गुणवता बनाए रखने पर ध्यान दे अन्यथा अतीत की भांति इस रोड़ पर करोडों रूपये व्यय करने के बावजूद भी इस सड़क की हालत आशानुकूल नहीं सुधर पाई है। 

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