अदालती आदेशों के बावजूद चमियाना अस्पताल में बेला सरदार सर्वजीत सिंह बॉबी को 'लंगर' के लिए नही मिली जगह

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक बार फिर विवादों और चर्चाओं में है। प्रसिद्ध समाजसेवी और 'वेला सरदार' के नाम से विख्यात सरबजीत सिंह बॉबी ने अस्पताल प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है

May 9, 2026 - 16:56
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अदालती आदेशों के बावजूद चमियाना अस्पताल में बेला सरदार सर्वजीत सिंह बॉबी को 'लंगर' के लिए नही मिली जगह
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शिमला 09 मई, 2026 : 

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक बार फिर विवादों और चर्चाओं में है। प्रसिद्ध समाजसेवी और 'वेला सरदार' के नाम से विख्यात सरबजीत सिंह बॉबी ने अस्पताल प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बॉबी का आरोप है कि उच्च न्यायालय (High Court) के दो बार आदेश देने के बावजूद, अस्पताल परिसर में लंगर लगाने के लिए उन्हें आज तक जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई है।आज भी लोग खुले में भोजन करने को मजबूर हैं


 विओ:  सर्वजीत सिंह  बॉबी ने सरकार की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि चमियाना अस्पताल में जो भी बुनियादी सुविधाएँ आज दिख रही हैं, वे जनता के प्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति से नहीं बल्कि कोर्ट के आदेशों से आई हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल के लिए बस सेवा और बिजली के पोल तक कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लगे हैं। बॉबी ने तंज कसा कि अगर लंगर की जगह, रैन बसेरा और स्वास्थ्य सुविधाओं का फैसला भी कोर्ट को ही करना है, तो जनता ने विधायक और सरकार क्यों चुनी?

उन्होंने कहा कि पिछले 7 महीनों से चमियाना में लंगर सेवा दे रहे  प्रशासन की बेरुखी के कारण आज भी हजारों लोग और उनके तीमारदार सड़क किनारे खुले में खाना खाने को मजबूर हैं।प्रतिदिन 4000 लोगों को भोजन सभी लहर में उपलब्ध करवाया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में भी सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक लंगर निरंतर चल रहा है। शहर भर से रोटियां एकत्रित कर अस्पताल पहुँचाई जाती हैं। आईजीएमसी (IGMC) से खाना बनकर चमियाना जाता है। बारिश के दिनों में स्थिति बदतर हो जाती है, जिससे भूखे मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि अस्पताल मार्ग पर न तो शौचालय हैं और न ही जलपान की कोई अन्य व्यवस्था। बॉबी ने मांग की कि स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को स्वयं आकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। 


सर्वजीत सिंह बॉबी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार एक तरफ महिलाओं को ₹1500 देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ वही महिलाएं अस्पताल के बाहर सड़क पर बैठकर लंगर खाने को मजबूर हैं। सरकार चाहे तो एक रात में व्यवस्था बदल सकती है, लेकिन यहाँ केवल इच्छाशक्ति की कमी है।" — सरबजीत सिंह बॉबी ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से 15 से 18 बार मिल चुके हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने उनका बिजली-पानी काटा था और वर्तमान सरकार भी उसी राह पर है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "इस सरकार के पास अब केवल दो साल बचे हैं, अपनी मनमर्जी कर ले।"

 उन्होंने कहा कि  वर्तमान में उनका चुनाव लड़ने का कोई विचार नहीं है, लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि उनकी समाज सेवा राजनीति से प्रेरित है, इसीलिए उनके काम में अड़ंगे डाले जा रहे है। उन्होंने स्थानीय विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि वे आज तक अस्पताल की सुध लेने नहीं आये। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में चुनाव लड़ना है या नहीं, यह उनका और जनता का निजी निर्णय होगा।समाजसेवी बॉबी ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे जगह मिले या न मिले, लंगर की सेवा निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अस्पताल को केवल शिफ्ट करना काफी नहीं है, वहां आने वाली जनता के मान-सम्मान और सुविधाओं का ध्यान रखना भी सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि 7 माह से बिना छत के चल रहा है लंगर।

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