डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन, में विवादित अधिकारी को कुलपति का प्रभार देना दुर्भाग्यपूर्ण : अभाविप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आज महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन सौंपते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन के कुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार डॉ. एच.एस. बवेजा को दिए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज करवाई
शिमला 09 मई, 2026 :
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आज महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन सौंपते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन के कुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार डॉ. एच.एस. बवेजा को दिए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज करवाई। विद्यार्थी परिषद ने कहा कि जिन अधिकारी के विरुद्ध केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित गंभीर मामलों में जांच एवं आरोप पत्र दायर किया जा चुका हो, ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय के सर्वोच्च प्रशासनिक पद का दायित्व देना प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा करना है।
विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि डॉ. एच.एस. बवेजा के विरुद्ध केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, देहरादून द्वारा कई मामलों में जांच की गई है। इन मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई हुई है।
ज्ञापन के अनुसार एक मामले में विशेष न्यायालय, देहरादून में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है और मामला वर्तमान में विचाराधीन है। दूसरे मामले में भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा आरोप पत्र दाखिल कर न्यायालय में अभियोजन चल रहा है, जबकि तीसरे मामले में जांच पूर्ण होने के बाद रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है।
विद्यार्थी परिषद ने कहा कि यह केवल प्रारंभिक आरोप नहीं हैं, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा विस्तृत जांच के उपरांत न्यायालय में प्रस्तुत आधिकारिक मामले हैं। विद्यार्थी परिषद ने यह भी कहा कि डॉ. बवेजा का नाम “Officer of Doubtful Integrity (ODI)” सूची हेतु अनुशंसित किया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था में ODI की श्रेणी अत्यंत गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इसमें उन अधिकारियों को शामिल किया जाता है जिनकी सत्यनिष्ठा एवं कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह हो।
विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि एक ओर प्रदेश सरकार एवं विभागीय अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामले दर्ज हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें विश्वविद्यालय के कुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार देना नैतिक एवं प्रशासनिक मानकों के विपरीत है। अभाविप ने कहा कि कुलपति का पद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि शैक्षणिक एवं नैतिक नेतृत्व का प्रतीक होता है। ऐसे पद पर किसी विवादित एवं आरोप पात्रित अधिकारी की नियुक्ति विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के मन में अविश्वास की भावना पैदा कर सकती है।
विद्यार्थी परिषद ने आज पालमपुर में राज्यपाल महोदय से मांग करते हुए कहा कि 08 मई 2026 को जारी आदेश पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए तथा विश्वविद्यालय की गरिमा एवं विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए किसी स्वच्छ एवं निष्पक्ष छवि वाले अधिकारी को यह दायित्व सौंपा जाए।
विद्यार्थी परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की साख बनाए रखना सरकार एवं लोक भावन दोनों की जिम्मेदारी है और इस प्रकार के निर्णय सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करने वाले सिद्ध हो सकते हैं।
विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी व्यक्तिगत भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नैतिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया कदम है।
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