हिमाचल में पहली बार किसी ग्लेशियर झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम किया जाएगा स्थापित  

लाहौल घाटी स्थित घेपन झील की सुरक्षा को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्तर पर अहम पहल हुई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की टीम लाहौल पहुंची और सिस्सू में जिला प्रशासन के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की

Apr 16, 2026 - 11:13
 0  6
हिमाचल में पहली बार किसी ग्लेशियर झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम किया जाएगा स्थापित  
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

यंगवार्ता  न्यूज़ - केलांग    16-04-2026

लाहौल घाटी स्थित घेपन झील की सुरक्षा को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्तर पर अहम पहल हुई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की टीम लाहौल पहुंची और सिस्सू में जिला प्रशासन के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की। हिमाचल प्रदेश में पहली बार किसी ग्लेशियर झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। 

यह पायलट प्रोजेक्ट सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत लाहौल घाटी की घेपन झील में शुरू किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग और लाहौल-स्पीति प्रशासन संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।

एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज और सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल इस सिलसिले में सिस्सू पहुंचे। यहां उन्होंने उपायुक्त किरण भड़ाना और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बर्फबारी के कारण फिलहाल घेपन झील तक पहुंच संभव नहीं होने से बैठक सिस्सू में की गई। 

उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि प्रस्तावित अत्याधुनिक सिस्टम झील में हिमखंड टूटने या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पहले ही खतरे का संकेत देगा। इससे ग्लेशियर झील फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं से समय रहते निपटने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने संभावित खतरे वाली ग्लेशियर झीलों की सूची तैयार की है, जिसमें घेपन झील भी शामिल है। यह झील समुद्र तल से लगभग 13,615 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी गहराई 100 मीटर से अधिक आंकी गई है। पूरी तरह हिमनद से बनी इस झील का आकार जलवायु परिवर्तन और बर्फ पिघलने के कारण लगातार बढ़ रहा है। 

विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह झील टूटती है तो इसका पानी सीधे चंद्रा नदी में जाएगा, जिससे लाहौल के कई गांवों के साथ-साथ मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और अटल टनल मार्ग को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। 

प्रशासन के अनुसार हाल ही में विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने झील का दौरा किया है और जल्द ही यहां हिमाचल का पहला सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह सिस्टम मौसम विभाग और प्रशासन को संभावित आपदा की पूर्व सूचना देगा, जिससे नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow