पंचायत चुनावों में जनता ने सुनाया सरकार के खिलाफ़ जनादेश : जयराम ठाकुर

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पंचायतीराज चुनाव के तीसरे और आखिरी चरण में शनिवार को मंडी जिला के अंतर्गत अपने सराज विधानसभा क्षेत्र की गृह पंचायत मुरहाग के मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदान किया और इस लोकतंत्र के महापर्व में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए प्रदेश के सभी मतदाताओं से सुशासन, पारदर्शी प्रशासन और ग्रामीण विकास के लिए योग्य प्रतिनिधियों को चुनने का आग्रह किया

May 30, 2026 - 19:50
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पंचायत चुनावों में जनता ने सुनाया सरकार के खिलाफ़ जनादेश : जयराम ठाकुर


मंडी 30 मई, 2026  :

​पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पंचायतीराज चुनाव के तीसरे और आखिरी चरण में शनिवार को मंडी जिला के अंतर्गत अपने सराज विधानसभा क्षेत्र की गृह पंचायत मुरहाग के मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदान किया और इस लोकतंत्र के महापर्व में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए प्रदेश के सभी मतदाताओं से सुशासन, पारदर्शी प्रशासन और ग्रामीण विकास के लिए योग्य प्रतिनिधियों को चुनने का आग्रह किया। बाद उन्होंने सराज विधानसभा की ही ग्राम पंचायत तुंगाधार की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी से घर  में आत्मीय भेंट कर उन्हें नवीन दायित्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पंचायतों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे।


इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न होने पर जनता का आभार जताते हुए कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि ये चुनाव पिछले साल दिसंबर में ही हो जाने चाहिए थे लेकिन कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर आपदा का बहाना बनाकर इन्हें छह महीने आगे खिसका दिया क्योंकि सरकार की शुरू से ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामना करने की मंशा नहीं थी, जिसके खिलाफ भाजपा को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और अंततः देश की शीर्ष अदालत के कड़े आदेशों के बाद ही राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों की प्रक्रिया शुरू की, जिसके प्रत्युत्तर में सुक्खू सरकार ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए कई तरह के षडयंत्र और प्रलोभन वाले हथकंडे अपनाए लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता ने सरकार के भारी दबाव और अनैतिक प्रलोभनों की परवाह किए बिना मतदान कर सरकार को जबरदस्त सबक सिखाया है और लगभग 75 प्रतिशत भाजपा विचारधारा के समर्थित प्रत्याशियों को अभूतपूर्व जीत दिलाकर यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि हिमाचल प्रदेश की जनता वर्तमान कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों, झूठी गारंटियों और विकास कार्यों को रोकने वाली कार्यप्रणाली से पूरी तरह तंग आ चुकी है और आने वाले समय में प्रदेश की सत्ता में पुनः भारतीय जनता पार्टी को वापस लाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही है, क्योंकि सत्ता के इस सेमीफाइनल माने जाने वाले पंचायती चुनाव में भाजपा ने जो प्रचंड बढ़त बनाई है वह सुक्खू सरकार की आंखें खोलने के लिए काफी है जबकि मुख्यमंत्री अपनी साख बचाने के लिए लगातार झूठ का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास को ठप करने वाली इस जनविरोधी कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए अब प्रदेश की जनता पूरी तरह कमर कस चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने ये कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश दिया है जिसे सरकार को स्वीकार करना चाहिए।


ईडी द्वारा गिरफ्तार क्रैक एकेडमी संचालकों से क्या रिश्ता बताएं मुख्यमंत्री सुक्खू...?

नेता प्रतिपक्ष ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यप्रणाली और संदिग्ध व्यावसायिक संलिप्तता पर अत्यंत गंभीर सवाल उठाए हैं कि चंडीगढ़, मोहाली, जीरकपुर और पंजाब के रियल एस्टेट क्षेत्र में मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के करोड़ों रुपयों की हेराफेरी के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किए गए संचालकों और प्रदेशमें चल रही 'क्रेक एकेडमी' से संबंधित प्रमोटरों से आखिर मुख्यमंत्री का क्या गुप्त रिश्ता है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने स्वयं प्रदेश विधानसभा के भीतर बड़े-बड़े वादे करते हुए सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यह 'क्रेक एकेडमी' हिमाचल प्रदेश के हर एक विधानसभा क्षेत्र में अपनी शाखाएं खोलेगी जिसके प्रचार-प्रसार और तथाकथित कौशल विकास के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये फूंक दिए गए लेकिन आज जब ईडी की जांच में इन प्रमोटरों द्वारा घर खरीदारों के पैसों को शेल कंपनियों और अंतर्निहित संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क के माध्यम से डायवर्ट करने तथा सीएलयू मंजूरियों में भारी हेराफेरी और विनियामक मानदंडों के उल्लंघन की संदिग्ध भूमिका पाई गई है और मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, तो यह हिमाचल प्रदेश के युवाओं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक बहुत बड़ा घोटाला प्रतीत होता है जिसने मुख्यमंत्री कार्यालय की शुचिता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है, इसलिए मुख्यमंत्री को तुरंत प्रदेश की जनता के सामने आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन दागी और हवाला कारोबार में संलिप्त प्रमोटरों को संरक्षण देने के पीछे उनकी क्या मजबूरी थी।

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